New Delhi: कर्ज के बोझ से लदे पडोसी देश पाकिस्तान का एक दिलचस्प मामला सामने आया है. पाकिस्तान की सरकार ने चीन का 1.4 अरब डॉलर का कमर्शियल लोन चुका दिया है. लेकिन, पाकिस्तान ने एक हाथ से जो लोन चुकाया है, अब वही दूसरे हाथ से वापस चाहता है. उसे उम्मीद इसी बात की है कि चीनी बैंक कुछ हफ्तों बाद वही रकम फिर से पाकिस्तान को उधार दे देंगे. यानी कर्ज लौटाने के साथ ही दोबारा उसी पैसे का इंतजार शुरू हो गया है.
संसद की वित्त समिति की बैठक
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के गवर्नर जमील अहमन ने संसद की वित्त समिति की बैठक के बाद बताया कि जुलाई 2026 में पाकिस्तान ने कुल 2.2 अरब डॉलर की विदेशी कर्ज अदायगी की, जिसमें 1.4 अरब डॉलर चीन के कमर्शियल लोन का भुगतान था. गवर्नर के मुताबिक, चीनी बैंकों ने अभी तक इस रकम को रीफाइनेंस नहीं किया है, लेकिन उम्मीद है कि कुछ हफ्तों में यह पैसा फिर पाकिस्तान को मिल जाएगा.
कर्ज चुकाने के बाद भी असली राहत
यानी पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था में कर्ज चुकाने के बाद भी असली राहत तभी मानी जा रही है, जब वही पैसा दोबारा उधार के रूप में वापस आ जाए. यह कोई नई बात नहीं है. पाकिस्तान ने कुवैत से कई दशक पहले कर्ज लिया था, जो अभी तक नहीं लौटा सका. SBP गवर्नर ने एक और चौंकाने वाली जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कुवैत का 250 मिलियन डॉलर का बकाया कर्ज 1990 के दशक का है, जो अब तक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.
पाकिस्तान को फिर रोलओवर की जरूरत
गवर्नर के मुताबिक, पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में रखे 12 अरब डॉलर के डिपॉजिट में 4 अरब डॉलर चीन और 8 अरब डॉलर सऊदी अरब के हैं. उन्होंने कहा कि दिसंबर 2026 और मार्च 2027 में मेच्योर होने वाली इन जमा राशियों के लिए पाकिस्तान को फिर रोलओवर की जरूरत पड़ेगी. रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकारों ने SBP गवर्नर से पूछा कि क्या पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स सहायता मांगी है. हालांकि, इस सवाल पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
इसे भी पढ़ें. वाह रे पाक कोर्ट! जिस पर था बच्ची के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप, उसी को दे दी कस्टडी, खड़ा हुआ विवाद