New Delhi: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) पर एक बयान देकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि रावलाकोट और मीरपुर के लोग असली कश्मीरी नहीं हैं. यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पीओके में विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं. कई रिपोर्टों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान नागरिकों के मारे जाने और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं.
जांच या पुष्टि उपलब्ध नहीं
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच या पुष्टि सभी मामलों में उपलब्ध नहीं है. आसिफ के इस बयान के बाद पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद (HRC) ने इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि संवैधानिक और सरकारी पदों पर बैठे लोगों को पहचान और जातीय मुद्दों पर बेहद जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ बोलना चाहिए.
आधिकारिक स्पष्टीकरण देने की मांग
परिषद ने पाकिस्तान सरकार से इस बयान पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देने और भविष्य में इस तरह की विवादित टिप्पणियों से बचने की मांग की है. PoK के नेता फैसल मुमताज राठौर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर रक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए ख्वाजा आसिफ या किसी अन्य नेता के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है.
जोड़ने के बजाय समाज में विभाजन
उन्होंने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्री का बयान लोगों को जोड़ने के बजाय समाज में विभाजन पैदा करता है. राठौर ने यह भी कहा कि जनाक्रोश बढ़ने के बाद रक्षा मंत्री अब पीओके की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाकर मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने ख्वाजा आसिफ से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की. रक्षा मंत्री के बयान ने पीओके के लोगों की पहचान को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है.
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