PoK में विरोध को दबाने में जुटे शहबाज-मुनीर, दूध और दवाइयों की सप्लाई रोकी, बद से बदतर हालात

Islamabad: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. दो हफ्ते से ज्यादा समय से अपनी मांगों को लेकर लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं. इसी बीच विरोध को दबाने की कोशिश लगातार जारी है. पाक सरकार पर आरोप है कि वह प्रदर्शनकारियों को झुकाने के लिए खाने-पीने की चीजों, ईंधन और दवाओं की सप्लाई रोक रही है.

इस विरोध को दबाने की कोशिश

शहबाज शरीफ की सरकार आर्मी चीफ असीम मुनीर किसी भी सूरत में इस विरोध को दबाने की कोशिश कर रहे हैं. स्थानीय लोगों, ट्रक ड्राइवरों और विपक्षी नेताओं ने स्थानीय मीडिया को बताया है कि जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों को पीओके के प्रदर्शनों से प्रभावित इलाके में घुसने से रोका जा रहा है. पाकिस्तानी अधिकारी किसी तरह की नाकेबंदी करने से इनकार करते हैं लेकिन स्थानीय लोगों से पता चलता है कि हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं.

आम लोगों के सामने संकट

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे शटडाउन (बंद) की वजह से पहले से ही पीओके में आम लोगों के सामने संकट हैं. सरकार के ब्लॉकेड की वजह रोजमर्रा की चीजों की कमी और गंभीर हो गई है. ऐसे में पीओके में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित है और सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है. कई इलाके में ना सिर्फ खाने पीने की चीजें बल्कि ईंधन की भी भारी कमी है.

बड़ों जिलों में पेट्रोल पंप बंद

पुंछ और मुजफ़्फराबाद जैसे बड़ों जिलों में अक्सर पेट्रोल पंप बंद देखे जा रहा हैं. वाहन चालकों को ब्लैक मार्केट से ईंधन खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है. वहीं इंटरनेट का ना होना लोगों की परेशानी को और ज्यादा बढ़ा रहा है. पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टी पीटीआई ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर पीओके में जरूरी सामान पहुंचने से रोकने का आरोप लगाया है. पार्टी ने कहा है कि आजाद पट्टन समेत कई रास्तों पर यात्रियों को रोका जा रहा है. उन्हें खाना, पीने का पानी और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं.

हालिया अशांति की शुरुआत

इस तरह की पाबंदियां एक बुरी मिसाल कायम करती हैं. पीओके में हालिया अशांति की शुरुआत विधानसभा की उन 12 सीटों को लेकर हुए विवाद से शुरू हुई है, जो कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं. स्थानीय समूहों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन सीटों का इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने और अपनी बात मानने वाली सरकारें बनाने के लिए करता है.

रावलकोट में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन

पाकिस्तान सरकार ने JAAC को बैन कर दिया है लेकिन उसके नेतृत्व वाला आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है. खासतौर से रावलकोट में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं. पीओके की कथित राजधानी मुजफ़्फराबाद में भी हजारों लोगों ने मार्च निकालकर आंदोलन तेज करने की धमकी पाकिस्तानी सरकार को दी है.

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