कंगाल पाकिस्तान को चीन ने दी संजीवनी बूटी, क्या दूर होगी इस्लामाबाद की गरीबी

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Pakistan China Trade Relations: पाकिस्तान इस समय हर हाल में अपने विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के मिशन में जोरों सोरो से लगा है. अभी हाल ही में खबर आई थी कि पाकिस्तान कुवैत को तेल के बदले अपनी फौज देने की बातचीत कर रहा है. वही, अब पाकिस्तान विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए अपने कृषि निर्यात पर बड़ा दांव लगा रहा है. दरअसल, चीन के साथ हुए नए समझौते के तहत पाकिस्तान इस साल 60 हजार टन चावल ग्वांगझोउ और शेनझेन प्रांतों में भेजेगा. इस सौदे से पाकिस्तान को 300 से 400 मिलियन डॉलर तक के निर्यात ऑर्डर मिलने की उम्मीद है.

चीन के साथ यह समझौता राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (REAP) ने किया है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की क्षमता है कि वह इतना चावल बेच सके और उसके पास भी खाने को रह जाए. फिलहाल, REAP का 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 28 जुलाई तक चीन के दौरे पर है, जहां व्यापारिक समझौतों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. REAP के उपाध्यक्ष जावेद जिलानी के मुताबिक, चीन में पाकिस्तानी चावल की मांग लगातार बढ़ रही है और यह दौरा काफी सफल रहा है.

कितना चावल बेच सकता है पाकिस्तान?

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान इस समझौते के तहत बासमती और गैर-बासमती दोनों तरह का चावल निर्यात करेगा. वहीं, इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान ने चीन को 124 मिलियन डॉलर का चावल निर्यात किया था. ऐसे में अब नए समझौते से यह आंकड़ा बढ़कर 300 से 400 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. अर्थात केवल एक साल में चीन को होने वाले चावल निर्यात में करीब तीन गुना बढ़ोतरी की संभावना बन गई है.
पाकिस्तान के लिए यह सिर्फ कृषि निर्यात बढ़ाने का मामला नहीं है. बल्कि लंबे समय से विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रही उसकी अर्थव्यवस्था के लिए चावल सबसे अहम निर्यात उत्पादों में शामिल है. कपड़ा उद्योग के बाद चावल पाकिस्तान को सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा दिलाने वाले क्षेत्रों में गिना जाता है. ऐसे में चीन जैसे बड़े बाजार में निर्यात बढ़ाकर इस्लामाबाद अपने डॉलर भंडार को मजबूत करना चाहता है.
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