New Delhi: सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता करने के बावजूद तुर्की यमन में हूतियों से लड़ने के लिए अपनी सेना भेजने को तैयार नहीं है. 8 अक्टूबर को तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने साफ कहा कि मक्का रक्षा समझौते का मतलब यह नहीं है कि तुर्की किसी देश पर हमला करने में शामिल होगा. फिदान ने पहले ही साफ किया कि समझौता दूसरे देशों पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि सदस्य देशों की रक्षा के लिए है.
तुर्की सुरक्षा में मदद कर सकता है
यानी अगर सऊदी अरब पर मिसाइल या ड्रोन हमला होता है, तो तुर्की उसकी सुरक्षा में मदद कर सकता है. लेकिन पाकिस्तान, अमेरिका और तुर्की मिलकर सऊदी की रक्षा भी नहीं कर सके. हूतियों ने रविवार को सऊदी के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई. वहीं तुर्की के लिए अपनी सेना को यमन भेजकर हूतियों से सीधे लड़ना अलग बात है. एक और बात समझना जरूरी है. इस समझौते को तुर्की की संसद से मंजूरी मिलना बाकी है. इतिहास को देखते हुए शायद ही तुर्की की संसद सेना को हूतियों के गढ़ नें भेजने को तैयार हो.
सीधे लड़ाई में क्यों नहीं उतारना चाहता?
सवाल है कि जब सऊदी अरब को मदद की जरूरत है और हूती लगातार हमले कर रहे हैं, तो तुर्की अपने सैनिकों को सीधे लड़ाई में क्यों नहीं उतारना चाहता? इसकी एक वजह युद्ध का खतरा है, तो दूसरी यमन का इतिहास भी है. यहां कभी ऑटोमन साम्राज्य (तुर्की) की सेना को लंबे समय तक विद्रोहियों ने गाजर मूली की तरह काटा था. लाखों सैनिकों की कब्र यमन में ही बन गई. अब सवाल है कि क्या तुर्की आज भी यमन में लंबे युद्ध के जोखिम से बचना चाहता है?
तीनों देशों के प्रतिनिधियों की रियाद में इमरजेंसी मीटिंग
7 अगस्त 2026 को तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच मक्का रक्षा समझौता हुआ था. इसका मकसद तीनों देशों की सुरक्षा में एक-दूसरे की मदद करना है. हूतियों के ताजा हमलों के बाद 5 अक्टूबर को तीनों देशों के प्रतिनिधियों की रियाद में इमरजेंसी मीटिंग की थी. इस बीच सऊदी अरब के समर्थन वाली यमन की सरकारी सेना ने ‘ऑपरेशन यमन डॉन’ शुरू किया. उसका कहना है कि वह मोखा, धुबाब और बाब अल-मंदेब के ऊंचाई वाले इलाकों पर फिर से कब्जा करने की कोशिश कर रही है. उसके मुताबिक, हूतियों ने पिछले महीने इन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की थी. ऐसे में उम्मीद थी कि तुर्की भी सऊदी अरब के साथ मिलकर हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है.
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