‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन आतंकवाद नहीं’, जिनेवा में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Geneva: जिनेवा प्रेस क्लब में मंगलवार को आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकार नियमों के उल्लंघन की चर्चा हुई. इस दौरान कई कश्मीरी नेता, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकारों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई.

यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के अनुसार, जिनेवा में चल रहे यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (यूएनएचआरसी) के 63वें सेशन के दौरान आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने वालों ने पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा न्यायेत्तर हत्या, लोगों के जबरन गायब किए जाने, मनमाने ढंग से गिरफ्तारी, कम्युनिकेशन ब्लैकआउट और बल के अत्यधिक प्रयोग के आरोपों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने सिविल सोसाइटी ग्रुप ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) और इस क्षेत्र में उनके शांतिपूर्ण जन-अधिकार आंदोलन के प्रति एकजुटता भी जाहिर की.

बैठक में इन मांगों पर भी दिया गया जोर

बैठक के दौरान, यूकेपीएनपी ने स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच, गैर-कानूनी हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही, पीड़ितों के परिवारों को न्याय, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और पीओके में मौलिक स्वतंत्रता की बहाली की मांग की. इसके अलावा, कब्जे वाले इलाके में लोकतांत्रिक स्व-शासन, प्राकृतिक संसाधनों पर मालिकाना हक, आने-जाने की आजादी, अभिव्यक्ति की आजादी, स्थिरता और कानून के शासन की मांगों पर भी जोर दिया गया.

यूकेपीएनपी ने आतंकवाद, उग्रवाद, राजनीतिक हिंसा और पीओके का इस्तेमाल “भू-राजनीतिक हितों के लिए हथियार” के तौर पर किए जाने का विरोध दोहराया. यूएनएचआरसी सेशन को संबोधित करते हुए, अफ्रीकन डेवलपमेंट एसोसिएशन (एडीए) के प्रतिनिधि और यूकेपीएनपी के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी ने इस साल 5 जून से पीओके में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा दमन बढ़ने की खबरों पर गहरी चिंता जताई.

उन्होंने कथित उल्लंघनों की तत्काल, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे पाकिस्तान पर दबाव डालें ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो और अपने मौलिक लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों की सुरक्षा हो सके. शौकत अली ने काउंसिल से कहा कि “शांतिपूर्ण असहमति आतंकवाद नहीं है और अधिकारों की मांग करना कोई अपराध नहीं है.” उन्होंने पाकिस्तान से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग तुरंत बंद करने, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करने, लापता लोगों के बारे में जानकारी देने और पूरे पीओके में बिना किसी रोक-टोक के इंटरनेट और मोबाइल कम्युनिकेशन बहाल करने की मांग की.

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