‘…नोबेल नहीं मिलता, साझेदारी टूटती है’, भारत पर टैरिफ को लेकर अमेरिकी राजनेता का फूटा गुस्‍सा  

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Pramila Jayapal: अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भारत-रूस और चीन समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाया है, जिसके बाद से उनके रिश्‍तों में तनातनी देखने को मिल रही है. हालांकि भारत के साथ इस तनाव को कम करने के लिए अमेरिका लगातार बातचीत कर रहा है, फिलहाल कोई निष्‍कर्ष निकलता हुआ नजर नहीं आ रहा है. इस बीच अमेरिका के कई राजनेता भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर ट्रंप से नाराज हैं.

दरअसल, यूनाइटेड स्टेट्स की रिप्रेजेंटेटिव प्रमिला जयपाल ने कहा कि हम टैरिफ को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ये टैरिफ इंडिया की इकॉनमी को नुकसान पहुंचाने के साथ ही अमेरिकन बिजनेस और कंज्यूमर्स को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं.

बिजनेस के लिए बड़ा खतरा बना टैरिफ

उन्‍होंने आगे कहा कि पिछले हफ़्ते ही मैंने वाशिंगटन स्टेट में एक फैमिली-ओन्ड कंपनी की बात सुनी, जो इंडिया से आने वाले एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स का बिजनेस करती है. उन्होंने बताया कि वे लोग 120 सालों से काम कर रहे हैं. अब ये टैरिफ उनके बिजनेस के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है. वे बढ़ी हुई कॉस्ट को पूरा करने के लिए या तो अपना प्रोडक्शन छोटा करने या ऑफ़शोर करने पर विचार कर रहे हैं.

अमेरिकी प्रतिनिधि सिडनी कामगार-डोव का बयान

इसके अलावा, अमेरिकी प्रतिनिधि सिडनी कामगार-डोव ने भी टैरिफ का विरोध किया. उन्‍होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने वह रिश्ता बिगाड़ दिया है, जो दशकों की मेहनत से मजबूत हुआ था. ये टैरिफ भारत को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं. ट्रंप की नीतियों ने दोनों देशों की शीर्ष-स्तरीय बैठकों को पटरी से उतार दिया है. 50% शुल्क लगाना भारत को अलग-थलग करने जैसा कदम है. साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि भारत पर रूसी तेल के आयात को लेकर लगाया गया 25% टैरिफ भी सही नहीं है, जबकि अमेरिका में कुछ लोग रूस के साथ गुप्त सौदों की कोशिश कर रहे हैं.

H-1B वीज़ा की नई फीस भी विवादों में

कामगार-डोव ने इस बात पर भी चिंता जताई कि H-1B वीज़ा पर 100,000 डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) की फीस लगाने से उन भारतीय पेशेवरों को झटका लगेगा, जिन्होंने विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा और कला के क्षेत्र में अमेरिका को नई ऊंचाइयां दी हैं.

क्या भारत को अमेरिका से दूर धकेला जा रहा है?

इसके अलावा, उन्‍होंने चेतावनी दी कि गलत नीतियां भारत जैसे रणनीतिक साझेदार को दूर कर सकती हैं. इसका फायदा चीन और रूस जैसे देश उठाएंगे. कामगार ने कहा कि ऐसे फैसलों से कोई नोबेल नहीं मिलता, बल्कि साझेदारी टूटती है.

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