होर्मुज के बाद अब लाल सागर में भी जहाजों पर हो रहे हमले, भारत पर क्या होगा इसका असर

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Red Sea Closed: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अब दुनिया की समुद्री सप्लाई चेन पर दोहरा दबाव साफ दिखाई देने लगा है. एक ओर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बेहद कम बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ ईरान समर्थित हूतियों के ताजा हमले के बाद लाल सागर के बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटकर केवल 11 रह गई है.
शिपिंग डेटा कंपनी Kpler के मुताबिक, यह कई महीनों में सबसे कम ट्रैफिक है. रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट ऐसे समय आई है जब हूतियों ने सऊदी अरब के लाल सागर तट पर मौजूद अरामको के ठिकानों पर हमले का दावा किया है. इसके बाद कई शिपिंग कंपनियां इस समुद्री मार्ग से गुजरने में सतर्क हो गई हैं.

कौन-कौन से जहाजों ने दिखाई हिम्मत

Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को बाब-अल-मंदेब से केवल 11 कमोडिटी जहाज गुजरे, जिनमें सात तेल टैंकर थे. 3 जहाज लाल सागर में दाखिल हुए, जिनमें दो विशाल तेल टैंकर सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह की ओर कच्चा तेल लोड करने जा रहे थे. वहीं, तीसरा जहाज रूस से जुड़ा बताया गया है. लाल सागर से बाहर निकले 4 जहाजों में हांगकांग के झंडे वाला New Explorer भी शामिल था, जो 20 लाख बैरल सऊदी और UAE का कच्चा तेल लेकर चीन के निंगबो बंदरगाह जा रहा था.
बता दें कि इसी रास्ते से 10 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल लेकर एक अन्य टैंकर भी चीन के लिए रवाना हुआ, जबकि एक टैंकर करीब 7.5 लाख बैरल सऊदी तेल लेकर पाकिस्तान जा रहा था. यह बाब-अल-मंदेब से सुरक्षित निकलने वाला तीसरा चीनी VLCC भी है, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ चुनिंदा मार्गों पर तेल व्यापार अभी भी जारी है.

होर्मुज में भी नहीं लौटा भरोसा

दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच हमले फिलहाल थमे होने के बावजूद जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हो सकी है. वीकेंड में यहां से रोजाना 10 से भी कम जहाज गुजरे. शनिवार को तो सिर्फ तीन जहाज होर्मुज से निकले और तीनों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद कर रखे थे. इनमें कतर की ओर जा रहा एक तेल टैंकर, UAE के रुवैस बंदरगाह जा रहा एक एलपीजी टैंकर और जापान के लिए कतर का नैफ्था लेकर जा रहा एक जहाज शामिल था. रविवार को होर्मुज से गुजरने वाले सात जहाजों में तीन ईरान से जुड़े ऑयल प्रोडक्ट टैंकर भी शामिल थे, जो जलडमरूमध्य से बाहर निकले.

भारत की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

दरअसल, दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे जलडमरूमध्यों पर निर्भर है. इसके अलावा, भारत सहि त एशियाई देशों के लिए ये रास्ता महत्वपूर्ण है. यूरोप और एशिया के बीच का व्यापार इसी रास्ते से होता है. अगर किसी जहाज को एशिया से यूरोप जाना है तो पहले वह बाब-अल मंदेब को पार कर अरब सागर से लाल सागर में जाएगा. इसके बाद स्वेज नहर से गुजरते हुए वह भूमध्य सागर से यूरोप पहुंच सकेगा. अगर बाब अल मंदेब को ही बंद कर दिया जाए तो जहाजों को पूरा अफ्रीका घूम कर यूरोप पहुंचना होगा. इससे माल पहुंचने में ज्यादा समय, ज्यादा धन खर्च होगा. इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा. इससे तेल की आपूर्ति, माल ढुलाई, जहाजों के इंश्योरेंस और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है.

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