Serbia: सर्बिया में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन के आगे वहां के लीडर अलेक्जेंडर वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी के 14 साल के शासन का अंत हो ही गया. अब छात्र खुद सरकार चलाएंगे. राष्ट्रपति का पद छोड़कर पीएम पद के लिए चुनाव लड़ रहे अलेक्जेंडर वुसिक ने अपनी हार मान ली है. खास बात है कि इस आंदोलन की नींव एक रेल हादसे ने रखी थी. यह जीत एक कार्यकाल के बीच में कराए गई वोटिंग में मिली है.
बता दें कि इस बर्फीले देश में करीब दो वर्षो से सरकार विरोधी प्रदर्शन चले थे, जो साल 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर एक हादसे के बाद शुरू हुए थे. इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी.
अलेक्जेंडर वुसिक ने चुनाव में हार स्वीकार की
रिपोर्ट के अनुसार, सर्बिया के लंबे समय से सत्ता में रहे अलेक्जेंडर वुसिक ने राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में अपनी हार मान ली है. उन्होंने बताया कि विपक्षी ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने संसद में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है. शुरुआती नतीजों के बाद देश को संबोधित करते हुए, वुसिक ने वोटों के सैंपल आंकड़ों के आधार पर अपनी पार्टी की चुनावी हार को स्वीकार किया. इस दौरान राष्ट्रीय संसद में सीटों के संभावित बंटवारे का जिक्र करते हुए, वुसिक ने कहा कि ‘स्टूडेंट लिस्ट’ आसानी से अगली सरकार बना लेगी. वुसिक ने कहा कि स्टूडेंट लिस्ट जीत गई है और उसे 135 से 140 सीटें मिलेंगी, जबकि हमें लगभग 105 सीटें मिलेंगी. उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) सत्ता बनाए रखने में नाकाम रही है.
अलेक्जेंडर वुसिक विदेशी ताकतों को दे रहे दोष
56 साले के अलेक्जेंडर वुसिक ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान रूस के साथ करीबी संबंध बनाए रखे थे. वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाते हैं. अब चुनाव हारने के बाद उन्होंने इस नतीजे के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि लोग जानें कि यह एक ऐसी क्रांति की पुष्टि थी, जिसे कई यूरोपीय देशों और अमेरिका के ‘डीप स्टेट’ के सीधे समर्थन से अंजाम दिया गया था. वही ‘डीप स्टेट’ जो राष्ट्रपति ट्रंप के भी खिलाफ है.”
2 साल के छात्र आंदोलन ने दिखाई ताकत
बता दें कि साल 2024 के रेल हादसे के लिए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया गया था. इसने सर्बिया में 2000 में तानाशाह स्लोबोदान मिलोसेविच के पतन के बाद से, अब तक के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया. इसके बाद के करीब दो वर्षो से, छात्र देश भर में रैलियां और मार्च निकाल रहे हैं, ताकि वे सीधे मतदाताओं तक पहुंच सकें और वुसिक की ‘सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी’ के मीडिया तंत्र का मुकाबला कर सकें. ऐसे में वुसिक के विरोध-प्रदर्शनों में भारी भीड़ उमड़ी.
वही, एक स्वतंत्र निगरानी समूह के अनुसार, गुरुवार को भी राजधानी बेलग्रेड में चुनाव से पहले आयोजित अंतिम रैली में लगभग 1.5 लाख लोग शामिल हुए. इन छात्रों ने मिलकर अपना राजनीतिक दल बनाया- स्टूडेंट लिस्ट. इसके 250 उम्मीदवारों में से ज्यादातर शिक्षा और कला जैसे क्षेत्रों के एक्सपर्ट हैं और उन्हें राजनीतिक अनुभव बहुत कम है.