कोर्ट ने दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को किया बरी, झूठी गवाही देने का था आरोप 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

South Korea: सोल की एक अदालत ने गुरुवार को दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को झूठी गवाही देने के मामले में बरी कर दिया. येओल पर आरोप था कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू के विद्रोह मामले की सुनवाई के दौरान गलत बयान दिया था.

फिलहाल, जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति यून पर आरोप था कि उन्होंने पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री हान के ट्रायल में ऐसा माहौल बनाया कि 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ लागू करने से ठीक पहले जो कैबिनेट बैठक बुलाई गई थी, उसकी योजना पहले से बनाई गई थी. जबकि आरोप के अनुसार, यह बैठक हान के सुझाव के बाद बुलाई गई थी.

हान के सुझाव से पहले ही यून ने बुलाई कैबिनेट बैठक

वहीं इस मामले में सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि ट्रायल के दौरान यून ने जो बयान दिया, वह उनकी अपनी याददाश्त के खिलाफ था. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इस बात की ‘काफी संभावना’ है कि हान के सुझाव से पहले ही यून कैबिनेट बैठक बुलाने की योजना बना चुके थे.

कैबिनेट के सदस्य कोई गुड़िया नहीं

नवंबर में हान के ट्रायल के दौरान, यून से गवाह के तौर पर पूछा गया कि क्या उस समय के प्रधानमंत्री ने कैबिनेट बैठक बुलाने का सुझाव दिया था, ताकि मार्शल लॉ की घोषणा को नियमों के हिसाब से सही दिखाया जा सके. इस पर यून ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सवाल पहले से ही पक्षपातपूर्ण है. “कैबिनेट के सदस्य कोई गुड़िया नहीं हैं, जो सिर्फ दिखावे के लिए आकर बैठ जाएं.”

जाँच टीम ने पूर्व राष्ट्रपति पर लगाए ये आरोप

बता दें कि दिसंबर में विशेष जांच टीम ने पूर्व राष्ट्रपति पर झूठी गवाही का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि शुरुआत में यून की कोई योजना कैबिनेट बैठक बुलाने की नहीं थी, लेकिन हान के सुझाव के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया.

यून पर चल रहे आठ मामलों में मुकदमे

दरअसल, यून जुलाई से हिरासत में हैं और उन पर कुल आठ मामलों में मुकदमे चल रहे हैं. ये मामले उनके असफल मार्शल लॉ प्रयास, उनकी पत्नी से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप, और 2023 में एक मरीन की मौत से जुड़े हैं. वहीं, मुख्य मामले के पहले स्तर के ट्रायल में, फरवरी में उन्हें मार्शल लॉ लागू करने की कोशिश के जरिए विद्रोह का नेतृत्व करने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.

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