सूडान के कोर्डोफान क्षेत्र में कई जगहों पर घातक ड्रोन हमला; 77 लोगों की मौत, कई घायल

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Sudan civil war: सूडान के कोर्डोफान क्षेत्र में कई दिनों से लगातार ड्रोन हमलें जारी है. इस दौरान अलग-अलग जगहों पर हुए हमले में 77 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं. इसकी जानकारी युद्ध के दौरान हिंसा की निगरानी रखने वाले सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क द्वारा दी गई है. विश्लेषकों और मानवीय कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कहा कि इन हमलों के चलते सहायता अभियान बाधित हो रहे हैं.

आरएसएफ पर हमले का आरोप

बता दें कि सूडान करीब 3 साल से गृहयुद्ध की चपेट में है. आरोप है कि अधिकांश हमले पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) द्वारा घनी आबादी वाले इलाकों में किए गए. आरएसएफ और सूडानी सेना के बीच संघर्ष अप्रैल 2023 में शुरू हुआ था, जो अब पूर्ण युद्ध में बदल चुका है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस संघर्ष में अब तक कम से कम 40,000 लोग मारे गए हैं और 1.2 करोड़ विस्थापित हुए हैं. सहायता समूहों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि विशाल और दूरदराज के इलाकों में लड़ाई के कारण पहुंच मुश्किल है.

कोर्डोफान में ड्रोन और हवाई हमलें तेज

गैर-लाभकारी संगठन आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा (एसीएलईडी) के पूर्वी अफ्रीका के वरिष्ठ विश्लेषक जलाले गेटाचेव बिरु ने कहा कि पिछले साल सेना ने कोर्डोफान में ड्रोन और हवाई हमलों का उपयोग बढ़ाया है, क्योंकि संघर्ष पश्चिम की ओर स्थानांतरित हो गया है, जिससे यह क्षेत्र “प्रमुख युद्धक्षेत्र” बन गया है.

यूएन ने दी चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त मानवाधिकार वोल्कर तुर्क ने बुधवार को चेतावनी दी कि ये नवीनतम हत्याएं सूडान में ड्रोन युद्ध के बढ़ते उपयोग के नागरिकों पर विनाशकारी परिणामों की एक और याद दिलाती हैं. उन्होंने बाजारों, स्वास्थ्य सुविधाओं और स्कूलों सहित नागरिक स्थलों पर हमलों की निंदा की.

नागरिकों के खिलाफ ड्रोन का उपयोग करने के सबूत

यूएन प्रवक्ता स्टेफेन दुजार्रिक ने कहा कि इस सप्ताह के हमलों में दोनों पक्षों द्वारा नागरिकों के खिलाफ ड्रोन का उपयोग करने के सबूत हैं. ये नागरिक कभी सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में थे और कभी आरएसएफ नियंत्रित क्षेत्रों में, जिससे हमें विश्वास होता है कि दोनों पक्ष इन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं. दो सैन्य अधिकारियों ने मीडिया को ब्रीफ करने के अधिकृत न होने के कारण नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सेना नागरिक ढांचे को निशाना नहीं बनाती.

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