New Delhi: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है. कुछ मुद्दों पर सहमति न बन पाने की वजह से अभी समझौता सिरे नहीं चढ़ पाया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत सहित कुछ देशों के साथ अपनी शर्तों पर ट्रेड डील करना चाहते हैं. इसीलिए वह टैरिफ के इस हथकंडे को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी बीच अब अमेरिकी सीनेट ने रूस के एनर्जी सेक्टर पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को आगे बढ़ाया है.
100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार
अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा. इस बिल की रूपरेखा दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार की थी. यह पहली बार नहीं है. भारत अमेरिका के बीच ट्रेड डील वार्ता शुरू होने के बाद ट्रंप कई बार इस हथियार को आजमा चुके हैं. लेकिन, भारत ऐसी किसी भी डील पर साइन करने से साफ मना कर चुका है, जो उसके हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप बौराये हुए हैं टैरिफ लगाने की धमकियां दे रहे हैं.
भारत पर दबाव बनाने की कोशिश
ट्रंप अपने आक्रामक टैरिफ कार्ड का इस्तेमाल कर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश पिछले साल से करते आ रहे हैं. एक तरफ जहां ट्रेड डील पर बातचीत की मेज सजी रही, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन ने दबाव की रणनीति जारी रखते हुए भारत समेत कई देशों पर नए टैरिफ की घोषणा की. भारत पर 10 फीसदी टैरिफ लगाया गया. रशियन एनर्जी पर नकेल कसने को लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किए गए इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट में जोरदार समर्थन मिला है.
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की अर्थव्यवस्था
सीनेट में इस विधेयक के पक्ष में 86 सांसदों ने वोट दिया, जबकि सिर्फ 12 ने इसका विरोध किया. इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की अर्थव्यवस्था और उसके ऊर्जा क्षेत्र की कमर तोड़ना है. इस विधेयक के पास होने पर ट्रंप को भारत, चीन और यूरोपीय संघ के उन देशों पर 100% तक टैरिफ थोप सके जो रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीद रहे हैं.
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