Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ रद्द करने के फैसले को निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. उन्होंने तर्क दिया कि देश में आए बेहतरीन आर्थिक बदलावों का मुख्य श्रेय उनकी टैरिफ नीतियों को ही जाता है. बता दें कि सदन में जब राष्ट्रपति ट्रंप अपना संबोधन दे रहे थे, तब वहां सुप्रीम कोर्ट के नौ में से चार जज भी मौजूद थे. उनकी ओर इशारा करते हुए ट्रंप ने यह बात कही.
टैरिफ लगाने का अधिकार संसद के पास
हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था. अदालत का तर्क था कि संविधान के तहत टैरिफ लगाने का प्राथमिक अधिकार अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास. कोर्ट ने राष्ट्रपति की इस शक्ति को अवैध करार दिया था. सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद ट्रंप पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
ट्रंप की राह इतनी आसान नहीं
उन्होंने सदन में घोषणा की कि उनके टैरिफ पूरी तरह स्वीकृत और परखे गए वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के तहत लागू रहेंगे. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह राह इतनी आसान नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद ट्रंप के सामने एक बड़ी संवैधानिक बाधा खड़ी हो गई है. वर्तमान में लागू 15 फीसदी टैरिफ को बचाने के लिए अब उन्हें संसद (कांग्रेस) की मंजूरी की आवश्यकता होगी.
सबसे बड़े झटकों में से एक
यदि अमेरिकी संसद अगले 150 दिनों के भीतर इन टैरिफ को कानूनी मान्यता नहीं देती है तो ये आयात शुल्क स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के उन छह जजों पर असामान्य रूप से व्यक्तिगत हमला बोला था, जिन्होंने टैरिफ़ रद्द करने का फ़ैसला सुनाया था. इसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के सबसे बड़े झटकों में से एक माना जा रहा है.
जजों को होना चाहिए शर्मिंदा
शुक्रवार को आए अदालत के फ़ैसले को ट्रंप ने गहरे तौर पर निशानाजनक बताया. सुप्रीम कोर्ट के जजों पर हमला बोलते हुए ट्रंप ने कहा था कि बहुमत के फ़ैसले से जुड़े जजों को निश्चित रूप से शर्मिंदा होना चाहिए और उनमें सही काम को करने का साहस नहीं था. ट्रंप राजनीतिक परंपराओं को तोड़ने और अपनी सत्ता को चुनौती देने वालों को सार्वजनिक रूप से फटकारने के लिए जाने जाते हैं.
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