Turkey: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप एर्दोगन ने बिना नाम लिए इजरायल, ग्रीस और साइप्रस को धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि पूर्वी भूमध्य सागर में आग लगाने की कोशिश की जा रही है और इसके अंजाम बहुत बुरे होंगे. दरअसल, इजरायल असल में साइप्रस और ग्रीस के सहारे तुर्की को घेरने की कोशिश कर रहा है और इसी को लेकर राष्ट्रपति एर्दोगन आगबबूला हो गये और उन्होंने सख्त जवाब देने की धमकी दी है.
राष्ट्रपति एर्दोगन ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए हैं, जिसमें उन्होंने लिखा है कि ‘हम देख रहे हैं कि पूर्वी भूमध्य सागर में खासकर साइप्रस द्वीप पर झगड़े की आग भड़काने की कोशिश की जा रही है. हम इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं. मैं यह बात बहुत साफ तौर पर कह रहा हूं अगर पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की और तुर्किस-साइप्रस के लोगों के अधिकारों और कानूनी दावों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो हमारा जवाब बहुत साफ और बहुत सख्त होगा.’
इजरायल के खिलाफ आग क्यों उगल रहे एर्दोगन?
दरअसल, इजरायल, साइप्रस और ग्रीस के बीच बन रहा एक नया सैन्य और ऊर्जा ब्लॉक है जिसे तुर्की अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मान रहा है. ऐसे में एर्दोगन का कहना है कि ‘कुछ छोटे गुट जिनकी महत्वाकांक्षाएं उनके आकार से कहीं ज्यादा हैं जायोनवाद के लिए सब-कॉन्ट्रैक्टर की भूमिका निभाते हुए इजरायल के अशांति फैलाने वाले अभियान में शामिल हो गए हैं. ये गुट इस क्षेत्र में महज हवाई किले बना रहे हैं.’
इसी बीच उन्होंने धमकी देते हुए कहा ‘मैं बहुत साफ तौर पर कहता हूं किसी को भी ऐसी जोखिम भरी हरकत नहीं करनी चाहिए. किसी को भी हत्यारों के जायोनी नेटवर्क के रास्ते पर नहीं चलना चाहिए. यदि पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की और तुर्की-साइप्रस के लोगों के अधिकारों और कानूनों को खतरा होता है तो मैं चाहता हूं कि सबको पता हो कि हमारा जवाब बहुत कड़ा होगा.’
एर्दोगन ने इजरायल को दी सीधी धमकी
एर्दोगन ने कहा कि ‘अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी’ से इजरायल का हौसला बढ़ गया है, जिससे वह ‘बेहद अहंकार के साथ काम कर रहा है और इससे हमारे क्षेत्र में पूरी तरह से शांति, स्थिरता और सुरक्षा हासिल करने में बाधा आ रही है. तुर्की के राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा ‘इजरायल को कानून के दायरे में वापस लाना अब सिर्फ कुछ देशों का मामला नहीं रह गया है बल्कि यह पूरी मानवता के लिए साझा चिंता का विषय है. ईरान और लेबनान पर हुए हमलों का असर न सिर्फ इस क्षेत्र के देशों पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ा है.’
इजराइल, ग्रीस और साइप्रस का त्रिकोणीय सैन्य गठबंधन
- बता दें कि इजराइल ने ग्रीस और साइप्रस (ग्रीक प्रशासन) के साथ मिलकर पूर्वी भूमध्य सागर में एक संयुक्त रैपिड-रेस्पॉन्स मिलिट्री फोर्स बनाने का समझौता किया है.
- इस विशेष सैन्य टास्क फोर्स में करीब 2,500 सैनिक शामिल हैं लेकिन तुर्की इसके बनने के बाद से भड़का हुआ है.
- इसके तहत इजरायली वायुसेना और नौसेना ग्रीस के साथ साइप्रस के द्वीपों जैसे रोड्स और कारपाथोस पर बने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर रही हैं.
- तुर्की इसे अपनी समुद्री सीमाओं और उत्तरी साइप्रस (जिसका तुर्की समर्थन करता है) की घेराबंदी के तौर पर देख रहा है. इजरायल इन जगहों से काफी आसानी के साथ तुर्की पर हमले कर सकता है.
लेबनान और सीरिया में इजरायली हमलों से भी भड़का तुर्की
इसके अलावा लेबनान और सीरिया में भी इजरायली हमलों से तुर्की भड़का हुआ है. एर्दोगन ने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से कहा है कि ‘सीरिया और लेबनान पर इजराइल के हमले अब उस सीमा तक पहुंच गए हैं जहां वे सीधे तुर्की के लिए खतरा बन रहे हैं.’ बता दें कि तुर्की की भौगोलिक सीमाएं सीरिया से लगती हैं.ऐसे में एर्दोगन को डर है कि यदि इजराइल ने लेबनान और सीरिया पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया तो अगली कूटनीतिक या सैन्य लड़ाई सीधे तुर्की की सीमाओं पर होगी.

