डॉल्फिन ने 151kmph की रफ्तार से चीन-जापान में ढाया कहर, अब भारत के मॉनसून पर मंडराया भीषण संकट

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Typhoon Dolphin : प्रशांत महासागर से उठे टाइफून डॉल्फिन की 151 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही हवाएं और मूसलाधार बारिश ने पूर्वी एशिया में भारी तबाही मचाई हैं. 9 अगस्त को चीन के झेजियांग प्रांत के युहुआन के पास तट से टकराए इस शक्तिशाली तूफान ने तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश से बड़े इलाके को तहस-नहस कर दिया. इस दौरान बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए करीब 10 लाख लोगों को चीन में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा. वहीं, अब ये भारत के मानसून को भी अपनी जद में लेने वाला है, जिससे मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी हुई है.
फिलहाल, तूफान डॉल्फिन कमजोर पड़ चुका है, लेकिन इसका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. बदलते जलवायु के दौर में ऐसे शक्तिशाली तूफानों के प्रभाव को समझना और पहले से तैयारी करना अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है. यही कारण है कि भारत भी अपनी तैयारी में जुटा हुआ है. चक्रवात के बंगाल की खाड़ी की ओर जाते ही ये दिक्कत होगी कि भारत का मानसून दक्षिणी इलाके में कमजोर पड़ने लगेगा.

चीन में डॉल्फिन ने ढाया कहर 

डॉल्फिन का सबसे गंभीर प्रभाव चीन के पूर्वी हिस्से में देखने को मिला. झेजियांग के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया. इसके अलावा, शंघाई जैसे विशाल शहर में भी बारिश ने पुराने रिकॉर्ड को चुनौती दे दी. कुछ इलाकों में एक दिन के भीतर 200 मिलीमीटर से ज्यादा पानी बरसा, जिससे सड़कों पर पानी भर गया, उड़ानों को रद्द करना पड़ा और ट्रेन सेवाओं पर भी असर पड़ा. इतना ही नही, कई संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. तू झेजियांग, जियांग्सू और आसपास के इलाकों में प्रशासन अब भी अलर्ट पर है.
बता दें कि चीन पहुंचने से पहले डॉल्फिन ने जापान के दक्षिणी ओकिनावा क्षेत्र में दस्तक दी. तेज हवाओं और बारिश के कारण कई जगह नुकसान हुआ और बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई. कुछ लोग घायल भी हुए हैं हालांकि जापान में तूफान का असर चीन जितना भीषण नहीं रहा, लेकिन आइलैंड के इलाकों में लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. इसके अलावा, उड़ानों और परिवहन सेवाओं पर भी इसका असर दिखाई दिया.

भारत के मानसून पर कैसे होगा असर?

  1. डॉल्फिन का सीधा असर भारत पर नहीं पड़ा है, लेकिन ये प्रशांत महासागर में बनने वाले पावरफुल वेदर सिस्टम और हजारों किलोमीटर दूर भारतीय मॉनसून के व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं.
  2. टाइफून जैसी प्रणालियां समुद्र से बड़ी मात्रा में गर्मी और नमी खींचती हैं. इससे बड़े पैमाने पर वायुमंडल में बदलाव हो सकता है जो आगे चलकर भारतीय महासागर और बंगाल की खाड़ी के मौसम को प्रभावित कर सकता है.
  3. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रशांत में सक्रिय मौसम प्रणालियां कभी-कभी पश्चिम की ओर बढ़कर बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र बनने में भूमिका निभाती हैं यानि प्रशांत की हलचल भारत के लिए हमेशा बुरी खबर नहीं होती. कुछ परिस्थितियों में यही गतिविधियां मॉनसून को नई बारिश प्रणालियां भी दे सकती हैं.
  4. मसला ये है कि यदि एल नीनो जैसी परिस्थितियां हावी होती हैं और उष्णकटिबंधीय गतिविधियां पूर्व की ओर खिसकती हैं, तो भारतीय क्षेत्र में बारिश लाने वाला वायुमंडलीय सिस्टम कमजोर पड़ सकता है. यही वजह है कि डॉल्फिन के बाद वैज्ञानिक सिर्फ चीन और जापान के मौसम पर नहीं, बल्कि पूरे एशियाई मौसम पर नजर रख रहे हैं.
Latest News

पीएम मोदी 17 सितंबर को करेंगे ‘सेमीकॉन इंडिया’ के पांचवें सत्र का उद्घाटन, 240 से ज्यादा इंटरनेशनल कंपनियां होंगी शामिल

SEMICON India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में सेमीकॉन इंडिया 2026 के पांचवें संस्करण का उद्घाटन...

More Articles Like This

Exit mobile version