Urdhva Mukha Paschimottanasana: आज की लाइफस्टाइल में लंबे समय तक बैठे रहना रोजमर्रा का हिस्सा बन गया है. घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने की वजह से कंधों में जकड़न, पैरों में खिंचाव और शरीर के पिछले हिस्से में अकड़न जैसी परेशानियां आम हो गई हैं. ऐसे में योग केवल शरीर को अलग-अलग मुद्राओं में मोड़ने का अभ्यास नहीं है, बल्कि शरीर को बेहतर तरीके से समझने और खुद से जुड़ने का एक माध्यम भी है.
योग की इसी पद्धति में ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन को एक उन्नत आसन माना जाता है. यह आसन शरीर की जकड़न खोलने, लचीलेपन को बढ़ाने और पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मददगार माना जाता है. यह पश्चिमोत्तानासन और संतुलन का मिला-जुला रूप है, जिसमें शरीर के पिछले हिस्से को गहरा खिंचाव मिलता है.
क्या है ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन?
ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन तीन शब्दों से मिलकर बना है. ऊर्ध्व मुख का अर्थ ऊपर की तरफ चेहरा, पश्चिम का अर्थ शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान का अर्थ गहरा खिंचाव होता है. वहीं आसन का अर्थ मुद्रा या शारीरिक स्थिति से है. इस आसन को अंग्रेजी में Upward Facing Intense West Stretch कहा जाता है. इसमें उभय पादांगुष्ठासन की तरह पैरों के अंगूठों को पकड़कर शरीर का संतुलन बनाया जाता है. इसके साथ धड़ को आगे की तरफ पैरों की ओर झुकाया जाता है. यह आसन अष्टांग योग की प्राथमिक श्रृंखला में शामिल है और उभय पादांगुष्ठासन के बाद का अगला स्तर माना जाता है.
पश्चिमोत्तानासन और संतुलन का मिला-जुला रूप
योग परंपरा में ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन को एक उन्नत योगासन माना जाता है. इसमें पश्चिमोत्तानासन के गहरे स्ट्रेच के साथ शरीर का संतुलन भी शामिल होता है. इस आसन में बैठकर पैरों को सीधा रखा जाता है और आगे की तरफ झुकते हुए पैरों के अंगूठों को पकड़ा जाता है. इस दौरान रीढ़ और पैरों के पिछले हिस्से में गहरा स्ट्रेच महसूस होता है.
आयुष मंत्रालय के अनुसार कैसे किया जाता है अभ्यास?
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी ऊर्ध्वमुख पश्चिमोत्तानासन को लेकर प्रतिक्रिया दी है. उनके अनुसार, यह एक उन्नत योगासन है, जिसमें शरीर का संतुलन कूल्हों यानी सिट बोन्स पर रखा जाता है. दोनों पैरों को ऊपर आकाश की ओर सीधा खींचते हुए हाथों से पंजों को पकड़ा जाता है. मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास कोर शक्ति, रीढ़ के लचीलेपन और शरीर के संतुलन को बेहतर करने में मदद करता है.
रीढ़ और पैरों के पिछले हिस्से को मिलता है गहरा स्ट्रेच
यह एक ऐसा योगासन है जिसमें बैठकर पैरों को सीधा रखते हुए आगे की तरफ झुका जाता है. पैरों के अंगूठों को पकड़ने की स्थिति में रीढ़ और पैरों के पिछले हिस्से को गहरा स्ट्रेच मिलता है. इसके नियमित अभ्यास से हैमस्ट्रिंग, यानी जांघ के पीछे की मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ाने में मदद मिलती है. यह आसन शरीर के पीछे वाले हिस्से के लचीलेपन और आगे वाले हिस्से की ताकत को एक साथ विकसित करने पर काम करता है.
इसका उद्देश्य केवल बैठे रहने के दौरान शरीर में लचीलापन बनाए रखना नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के कामकाज के दौरान भी उस लचीलेपन और ताकत को बनाए रखने में मदद करना है.
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