जेलेंस्की ने ठुकराया अमेरिकी राष्ट्रपति का पीस प्लान, गुस्साए ट्रंप ने दे डाला अल्टीमेटम!

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Ukraine-Russia Peace Plan : वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है. ऐसे में यूक्रेन के राष्ट्रपति ने ‘’हम अपने देश से गद्दारी नहीं कर सकते’’, कहकर डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. उनके इस बात से गुस्‍साए ट्रंप ने भी दो टूक कह दिया है कि यूक्रेन को लगातार मदद करना संभव नहीं है. बता दें कि यूक्रेन जंग को जल्द समाप्त करने के लिए ट्रंप ने रूस के साथ मिलकर गुपचुप मसौदा तैयार किया था.

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार इस शांति समझौते के ड्राफ्ट को ट्रंप ने जेलेंस्की के पास भिजवाया था. फिलहाल अभी तक ड्राफ्ट की शर्तों को लेकर कोई खुलासा नहीं किया गया था, लेकिन कहा जा रहा है कि यूक्रेन को रूस के हाथों खोए दोनेत्स्क और लुहांस्क पर अपना अधिकार हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ने को कहा गया था. बता दें कि ट्रंप के पीस प्लान में यूक्रेन को अपने संविधान में नाटो की सदस्यता कभी ना लेने की बात को शामिल करने के लिए भी कहा गया था.

हमारे पास शांति स्थापित करने का एक रास्ता है– ट्रंप

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि “हमें लगता है कि हमारे पास शांति स्थापित करने का एक रास्ता है, उन्‍होंने ये भी कहा कि वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को इसकी मंज़ूरी देनी होगी. उनका मानना है कि वे काफ़ी क़रीब पहुंच रहे हैं, लेकिन मैं कोई भविष्यवाणी नहीं करना चाहता.” बता दें कि इस मामले को लेकर उनकी की गई यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा तैयार की गई एक नई शांति योजना पर तेज़ चर्चाओं के बीच आई थी.

वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा

बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने चेतावनी देते हुए कहा था कि देश अपने इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षणों में से एक का सामना कर रहा है, इसका मुख्‍य कारण है कि वह अमेरिकी प्रस्ताव के प्रभावों पर विचार कर रहा है. इसके साथ ही जेलेंस्‍की ने कीव में अपने कार्यालय के बाहर एक जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और दोहराया कि वो यूक्रेनी लोगों के साथ कभी विश्वासघात नहीं करेंगे.

यूक्रेन के सामने एक ही कठिन विकल्‍प

उन्‍होंने ये भी कहा कि “यह हमारे इतिहास के सबसे कठिन क्षणों में से एक है. लेकिन हम इसका डटकर सामना करेंगे. ऐसे में अब यूक्रेन के सामने एक बहुत ही कठिन विकल्प है या तो अपनी गरिमा खोना या एक प्रमुख सहयोगी को खोने का जोखिम उठाना.” साथ ही उनका कहना है कि “मैं यह सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे लड़ूंगा कि योजना के कम से कम दो बिंदुओं की अनदेखी न हो. पहली यूक्रेनियों की गरिमा और दूसरी हमारी स्वतंत्रता.”

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