भारत की ट्रेड डील से बौखलाया बांग्लादेश, ट्रंप के साथ सीक्रेट समझौते की कोशिश में जुटे यूनुस

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US-Bangladesh trade deal: भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट के बाद बांग्लादेश को बौखलाहट मची हुई है. ऐसे में वो 12 फरवरी को होने वाले नेशनल इलेक्शन से ठीक 72 घंटे पहले अमेरिका के साथ एक ट्रेड एग्रीमेंट साइन करने वाला हैं. वहीं, इस डील की शर्तो को काफी गोपनीय रखी गई है, जिसकी काफी आलोचना भी हुई है.

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए एग्रीमेंट से भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था. ऐसे में बांग्लादेश को डर है कि यदि उसे उतने ही कॉम्पिटिटिव या बेहतर शर्तें नहीं मिलीं, तो वह भारत से मार्केट शेयर खो देगा. क्योंकि उसकी इकॉनमी काफी हद तक अमेरिका को रेडीमेड गारमेंट (RMG) एक्सपोर्ट पर निर्भर है. इससे उसके अमेरिकी एक्सपोर्ट का लगभग 90 प्रतिशत है.

किसी के साथ शेयर नहीं किया गया ड्राफ्ट

हाल ही में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अमेरिका के साथ एक औपचारिक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट साइन किया, इस दौरान सभी टैरिफ और ट्रेड बातचीत को गोपनीय रखने का वादा किया गया. इस एग्रीमेंट का कोई भी ड्राफ्ट न तो जनता, न संसद और न ही इंडस्ट्री के मुख्य स्टेकहोल्डर्स के साथ शेयर किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अगस्त में कॉमर्स एडवाइजर, एसके बशीर उद्दीन ने कहा था, “समझौते में ऐसा कुछ भी नहीं होगा जो देश के हितों के खिलाफ हो. अमेरिका की सहमति के बाद इसे सार्वजनिक भी किया जाएगा.”

डील में अमेरिका की शर्तें

सूत्रों की माने तो दोनों देशों के बीच हुई इस डील में कई ‘शर्तें’ हैं. पहली-चीन से इंपोर्ट कम करना और चीन के बजाय अमेरिका से मिलिट्री इंपोर्ट बढ़ाना. दूसरी अमेरिकी इंपोर्ट को बांग्लादेश में बिना किसी रोक-टोक के आने की इजाज़त मिलनी चाहिए. तीसरी- दक्षिण एशियाई देश को बिना कोई सवाल उठाए अमेरिकी स्टैंडर्ड और सर्टिफिकेशन को स्वीकार करना होगा. चौथी- अमेरिका के वाहनों और पार्ट्स के इंपोर्ट के संबंध में कोई इंस्पेक्शन नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वाशिंगटन चाहता है कि उसकी गाड़ियों को बांग्लादेश के बाज़ार में आसानी से एंट्री मिले.

पारदर्शी नही ट्रेड डील

प्राइवेट रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (CPD) के एक जाने-माने फेलो देवप्रिया भट्टाचार्य ने बताया कि यह ट्रेड डील पारदर्शी नहीं है, क्योंकि इसके फायदे और नुकसान पर विचार करने का कोई मौका नहीं मिला है. उनका कहना है कि टैरिफ समझौता चुनाव के बाद साइन होता, तो राजनीतिक पार्टियां इस पर चर्चा कर सकती थीं.

ऐसे में सोचने वाली बात ये भी है कि क्‍या आने वाली चुनी हुई सरकार के हाथ बांधे जा रहे हैं. वैसे तो एक गैर-चुनी हुई अंतरिम सरकार चुनाव से तीन दिन पहले यह डील साइन कर रही है, इसका मतलब है कि समझौते को लागू करने की जिम्मेदारी उस पार्टी पर पड़ेगी जो नई चुनी हुई सरकार बनाएगी.

इसे भी पढें:-स्पेन और पुर्तगाल में लियोनार्डो तूफान का कहर, जलमग्न हुए कई शहर, 4000 लोगों ने खाली किए घर

Latest News

22 September 2026 Ka Panchang: मंगलवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

22 सितंबर 2026 मंगलवार को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. जानिए आज का पंचांग, एकादशी तिथि, श्रवण नक्षत्र, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त, शहरों के अनुसार राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय.

More Articles Like This

Exit mobile version