US Cuba Crisis: अमेरिका ने क्यूबा की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी यूनियन क्यूबा-पेट्रोलियो (CUPET) पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार ऊर्जा संसाधनों का इस्तेमाल दमनकारी नीतियों को बनाए रखने और शीर्ष नेतृत्व को लाभ पहुंचाने के लिए कर रही है. इन प्रतिबंधों के तहत CUPET की अमेरिका में मौजूद या अमेरिकी व्यक्तियों के नियंत्रण वाली सभी संपत्तियां और हित फ्रीज कर दिए जाएंगे तथा उनकी जानकारी अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFC) को देनी होगी.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश 14404 के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सीयूपीईटी को प्रतिबंधित संस्था घोषित करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार लंबे समय से ऊर्जा संसाधनों को दमन और भ्रष्टाचार के साधन के रूप में इस्तेमाल करती रही है. दशकों से बुनियादी ढांचे में पर्याप्त निवेश नहीं होने के वजह से आम क्यूबाई नागरिक ईंधन की कमी और लगातार बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं, जबकि देश का नेतृत्व ऊर्जा संसाधनों का अपने हित में उपयोग कर रहा है.
अमेरिका का क्या आरोप है?
अमेरिकी विदेश मंत्री का कहना है कि क्यूबा के नेताओं ने ऊर्जा की कमी के बावजूद तेल और ईंधन को दूसरे बाजार में बेचा, सेना और खुफिया एजेंसियों के लिए ऊर्जा का भंडारण किया और ऊर्जा आपूर्ति को सामाजिक नियंत्रण के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया. जहां आम क्यूबाई नागरिक अपनी गाड़ियों में ईंधन भरवाने के लिए हफ्तों इंतजार करते हैं और लगातार बिजली संकट झेलते हैं, वहीं कास्त्रो परिवार निजी जेट से यात्रा करता है. सरकार लक्जरी पर्यटन होटलों में बिजली आपूर्ति को प्राथमिकता देती है.
अमेरिकी विदेश विभाग ने दी चेतावनी
अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित संस्थाओं या क्यूबा की नामित आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विदेशी व्यक्ति, कंपनियां और वित्तीय संस्थान भी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं. अमेरिका ने कहा कि प्रतिबंधों का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना है. अमेरिका पिछले छह दशकों से अधिक समय से क्यूबा पर विभिन्न आर्थिक प्रतिबंध लागू किए हुए है, जो आधुनिक इतिहास के सबसे लंबे प्रतिबंध कार्यक्रमों में से एक माना जाता है.