US nuclear threat China Russia: वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और इसी के साथ अमेरिका के सामने सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी चुनौती उभरकर सामने आई है. अब अमेरिका को एक साथ दो बड़े परमाणु शक्तियों—चीन और रूस—से खतरे का सामना करना पड़ रहा है. यह बात अमेरिका के शस्त्र नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के अवर सचिव Thomas DiNanno ने कांग्रेस में हुई सुनवाई के दौरान सांसदों को संबोधित करते हुए कही. उनके इस बयान ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताओं को जन्म दे दिया है.
वैश्विक सुरक्षा माहौल में बड़ा बदलाव
डिनानो ने साफ कहा कि मौजूदा समय का खतरे का माहौल एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करता है. उन्होंने बताया कि अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही, जहां एक ही प्रमुख प्रतिद्वंदी पर ध्यान केंद्रित किया जाता था. अब अमेरिका को एक साथ बीजिंग और मॉस्को दोनों से परमाणु स्तर की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा, छोटे परमाणु क्षमता वाले देशों से भी जोखिम बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और जटिल होती जा रही है.
पुराने हथियार नियंत्रण सिस्टम हो रहे कमजोर
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पारंपरिक हथियार नियंत्रण व्यवस्था अब मौजूदा भू-राजनीतिक और तकनीकी परिस्थितियों के अनुसार पर्याप्त नहीं है. डिनानो के अनुसार, आज के समय में जो चुनौतियां सामने आ रही हैं, उनका स्तर और जटिलता पहले की तुलना में कहीं अधिक है, और पुराने समझौते इनका सामना करने में सक्षम नहीं हैं.
नए समझौतों की जरूरत पर जोर
डिनानो ने कहा, “एक नामांकित अधिकारी के रूप में मैंने ऐसे हथियार नियंत्रण समझौते तलाशने का संकल्प लिया है, जो सत्यापन योग्य और लागू करने योग्य हों तथा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करें.” उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में अमेरिका ऐसे समझौतों पर ध्यान देगा जो केवल कागजों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक रूप से प्रभावी हों.
मौजूदा तंत्र को किया जा रहा आधुनिक
उन्होंने बताया कि उनका विभाग पुराने हथियार नियंत्रण ढांचे को आधुनिक बनाने पर काम कर रहा है. मौजूदा संधियां वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करतीं, खासकर तब जब अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों की परमाणु क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं. इसलिए नई रणनीति और नए ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही है.
न्यू स्टार्ट संधि पर सवाल
अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली प्रमुख संधि New START Treaty को लेकर भी डिनानो ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा, “न्यू स्टार्ट ने सिर्फ अमेरिका को रोका, जबकि रूस को एक बड़ा थिएटर-रेंज्ड न्यूक्लियर हथियार बनाने और बनाए रखने की इजाजत दी.” उन्होंने सरकार के इस फैसले का बचाव किया कि अब इस पुराने समझौते से आगे बढ़ने की जरूरत है.
नई रणनीति पर काम कर रहा अमेरिका
डिनानो ने यह भी बताया कि अमेरिकी प्रशासन अब एक नए और अपडेटेड हथियार नियंत्रण फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है, जो बदलते वैश्विक हालात के अनुसार तैयार किया जा रहा है. यह दृष्टिकोण पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की उस सोच से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने नए और अधिक प्रभावी समझौते की जरूरत पर जोर दिया था.
सुरक्षा ढांचे का पुनर्गठन
उन्होंने स्टेट डिपार्टमेंट के “टी फैमिली” ढांचे का भी जिक्र किया, जो अब हथियार नियंत्रण, परमाणु अप्रसार, आतंकवाद-रोधी प्रयास और राजनीतिक-सैन्य मामलों को एक साथ जोड़ता है. इस पुनर्गठन के जरिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों में बेहतर तालमेल और प्रभावशीलता लाई गई है.
बढ़ रहा वैश्विक दबाव और चिंता
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक हथियार नियंत्रण व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. न्यू स्टार्ट संधि के कमजोर पड़ने के बाद अमेरिका और रूस के बीच रणनीतिक हथियारों पर लगी सीमाएं कम हो गई हैं, जिससे एक नई हथियार दौड़ की आशंका और गहरी हो गई है.
चीन का बढ़ता परमाणु कार्यक्रम
इसके साथ ही चीन का तेजी से बढ़ता परमाणु कार्यक्रम भी दुनिया के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. चीन फिलहाल किसी भी बाध्यकारी हथियार नियंत्रण समझौते का हिस्सा नहीं है, जिससे वैश्विक स्तर पर असंतुलन और अनिश्चितता बढ़ रही है.
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