पहले किए गए समझौतों से बिल्कुल अलग होगा यह सौदा, भारत से ट्रेड डील पर ट्रंप का बड़ा बयान

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US India Trade Deal: अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत को करीब दो साल पूरे होने वाले है, लेकिन अभी भी सभी को फाइनल डील का इंतजार है. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह समझौता अब पूरा होने के काफी करीब है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच होने वाला यह अंतिम समझौता, वाशिंगटन द्वारा पहले किए गए किसी भी व्यापार समझौते से काफी अलग होगा.

दरअसल, ओवल ऑफिस में ट्रंप से पत्रकारों ले पूछा कि क्या वाशिंगटन और नई दिल्ली किसी समझौते के करीब पहुंच रहे हैं. ऐसे में ट्रंप ने कहा कि “वे एक समझौता करना चाहते हैं. हम भी एक समझौता करने जा रहे हैं. हां, हम इसके काफी करीब हैं.”

पहले के समझौतों से होगा बिल्कुल अलग समझौता

डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि “यह हमारे द्वारा पहले किए गए समझौतों से बिल्कुल अलग तरह का समझौता होगा.” हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि प्रस्तावित समझौता पिछले ऐलान से किस तरह अलग होगा. साथ ही उन्होंने बातचीत पूरी होने की भी कोई तारीख भी नहीं बताई और न ही उन बचे हुए मुद्दों का जिक्र किया, जिनकी वजह से अंतिम समझौता अभी तक नहीं हो पाया है. फिर भी, उनकी टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन को उन व्यापार वार्ताओं में प्रगति की उम्मीद है, जिन पर दोनों देशों के व्यवसायों, एक्सपोर्टर्स और निवेशकों की पैनी नजर है.

द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा

बता दें कि रिपब्लिकन राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं जब विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के दौरे पर थे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा कर रहे थे. इस चर्चा में व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया. इस टाइमिंग को देखते हुए कहा जा सकता है कि राष्ट्रपति ट्रंप की ये टिप्पणियां दोनों देशों के बीच चल रही उच्च-स्तरीय राजनयिक बातचीत की पृष्ठभूमि में आई हैं.

क्या है भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

आपको बता दें कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं, जिसका मकसद बाजार तक पहुंच बढ़ाना और टैरिफ, कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामानों तथा नियामक बाधाओं से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को सुलझाना है.

दरअसल, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में इन व्यापार वार्ताओं का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि उन्होंने टैरिफ और बाजार तक आपसी पहुंच को अमेरिकी आर्थिक नीति का मुख्य हिस्सा बना दिया है. अमेरिकी सरकार का तर्क है कि व्यापारिक साझेदारों को अमेरिकी व्यवसायों के लिए अपने बाजार में ज्यादा पहुंच देनी चाहिए, और साथ ही अमेरिकी निर्यात को प्रभावित करने वाली बाधाओं को कम करना चाहिए.

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