सैन्य ठिकानों और बलों को…, अमेरिका-ईरान के रिश्ते में तनाव, ट्रंप के दखल देने के मामले को लेकर बोले खामनेई

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US-Iran Tension : ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बार फिर अमेरिका और ईरान के रिश्तों में तीखा तनाव देखने को मिल रहा है. ऐसे में ईरान की संसद के अध्यक्ष ने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि अगर अमेरिका ने कोई आक्रामक कदम उठाया तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बलों को वैध लक्ष्य माना जाएगा. जानकारी के मुताबिक, यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर हस्तक्षेप की धमकी दी थी.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी संसद अध्यक्ष का यह बयान चेतावनी के कुछ ही समय बाद आया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा था कि यदि अमेरिका ने किसी भी प्रकार से ईरान के आंतरिक मामलों में दखल दिया तो पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है. इस मामले को लेकर ईरान का कहना है कि बाहरी हस्तक्षेप से हालात और बिगड़ेंगे. इस दौरान इसके कुछ ही समय पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने एक सख्त बयान जारी किया और कहा कि अगर ईरानी सुरक्षा बल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल करते हैं, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है. बता दें कि उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है.

हिंसक झड़पों के दौरान अब तक 7 लोगों की मौत

बीते कुछ दिनों से ईरान में जारी प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पों की खबरें सामने आई हैं. साथ ही दोनों देशों के सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव में कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है. रविवार से शुरू हुआ यह आंदोलन अब और भी कई हिस्‍सों में फैल चुका है. हालात को देखते हुए माना जा रहा है कि प्रदर्शनों की जड़ में गहराता आर्थिक संकट है. ऐसे में अब हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों का गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है.

व्‍यापारियों ने सरकार के खिलाफ उठाई आवाज

बता दें कि दोनों देशों के बीच यह विरोध सबसे पहले राजधानी तेहरान में देखने को मिला, जहां व्यापारियों और दुकानदारों ने सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई. प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, ईरान की मुद्रा रियाल में भारी गिरावट, कमजोर आर्थिक विकास और आए दिन बढ़ती कीमतों ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में वहां महंगाई दर 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई. यानी डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत इतनी गिर चुकी है कि एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख रियाल हो गई है और इसकी वजह से आम नागरिकों की क्रय शक्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है.

राष्ट्रपति की नरम भाषा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनों को लेकर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अपेक्षाकृत नरम रुख दिखाया है. हालात को देखते हुए उन्‍होंने सार्वजनिक रूप से स्‍वीकार किया कि अगर लोगों की आजीविका से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसके गंभीर नैतिक और सामाजिक परिणाम होंगे. इसके साथ ही राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा आर्थिक हालात में सरकार के पास विकल्प सीमित हैं.

ईरान के अभियोजक जनरल की चेतावनी

इस मामले को लेकर ईरान के अभियोजक जनरल का कहना है कि शांतिपूर्ण आर्थिक विरोध को सरकार जायज मानती है, ऐसे में उन्‍होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी तरह की हिंसा या असुरक्षा फैलाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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