US-Israel Iran Attack: क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण अमेरिका ने कुवैत में अपने दूतावास को 3 मार्च 2026 से अगले आदेश तक बंद करने का ऐलान किया है. दूतावास ने सभी नियमित और आपातकालीन कांसुलर सेवाएं रद्द कर दी हैं. यह कदम मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच एहतियात के तौर पर उठाया गया है.
अमेरिकी दूतावास के पास धमाके
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह फैसला उस वक्त आया है, जब सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के पास धमाके की आवाज सुनी गई और धुआं उठता देखा गया था. एक सऊदी अधिकारी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अपनी एयर डिफेंस क्षमता इजरायल की सुरक्षा के लिए मोड़ दी और खाड़ी देशों को ईरानी हमलों के सामने खुला छोड़ दिया.
अमेरिकी सैनिकों की बड़ी मौत की पुष्टि
संघर्ष में पहली बार अमेरिकी सैनिकों की बड़ी मौत की पुष्टि हुई है. कुवैत के शुआइबा पोर्ट पर रविवार को एक अस्थायी ऑपरेशन सेंटर पर ईरानी हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि हमले के दौरान एक प्रोजेक्टाइल एयर डिफेंस को चकमा देकर अंदर पहुंच गया. इससे पहले इसे ड्रोन हमला बताया जा रहा था.
फ्रेंडली फायर की बताया घटना
मिडिल ईस्ट में जारी जंग और खतरनाक होती जा रही है. तनाव के बीच कुवैत की एयर डिफेंस ने गलती से तीन अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमानों को मार गिराया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे फ्रेंडली फायर की घटना बताया. छहों क्रू मेंबर सुरक्षित बाहर निकल गए और उनकी हालत स्थिर है. वीडियो में एक जलता हुआ विमान गिरता दिखा और एक पायलट पैराशूट से उतरता नजर आया.
खुद ट्रंप ने भी दी चेतावनी
रॉयटर्स और इप्सोस के सर्वे के अनुसार सिर्फ चार में से एक अमेरिकी ही ईरान पर हमले का समर्थन कर रहा है. लगातार बढ़ती अमेरिकी सैनिकों की मौत से घरेलू समर्थन और घट सकता है. खुद ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि आगे और नुकसान हो सकता है. मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. मिसाइल, ड्रोन, एयर डिफेंस और अब दोस्ताना फायरिंग तक की घटनाएं दिखा रही हैं कि जंग का दायरा बढ़ चुका है.
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