गालिबाफ- अराघची को मारने के प्लान में था इजरायल, ऐन वक्त परअमेरिका ने मारी एंट्री, यूं बचाई जान

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US Iran War: अमेरिकाऔर ईरान के बीच सीजफायर के दौरान इजरायल ने ऐसी चाल चली थी जिससे फिर से युद्ध की आग का धुआं उठ सकता है. दरअसल, युद्धविराम की बातचीत के बीच, इजरायल ईरान के शीर्ष वार्ताकारों को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की फिराक में था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल का प्लान ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची  की हत्या करने का था. लेकिन मेन मौके पर अमेरिका बीच में आ गया.

दरअसल, ट्रंप प्रशासन को डर था कि यदि इजरायल ने इन दोनों बड़े नेताओं को कुछ होता है, तो शांति की रही-सही उम्मीदें भी समाप्त हो सकती हैं, और दोनों देश एक बार फिर जंग में आमने-सामने की आ जाएंगे. लिहाजा, अमेरिका ने अपने अरब दोस्तों के माध्यम से ईरान को इस खौफनाक साजिश की पहले ही खबर दे दी.

इजरायल की हिट लिस्ट में थे ईरानी के टॉप लीडर

बता दें कि इस जंग की शुरुआत से ही ईरान की लीडरशिप का खात्मा करना इजरायल की रणनीति का अहम हिस्सा रहा है. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई से लेकर सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी तक, करीब 50 से ज्यादा ईरानी कमांडर और नेता हाल के वर्षों में इजरायली हमलों के शिकार हो चुके हैं.

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल का इकलौता मकसद ईरान की हुकूमत को नेस्तनाबूद करना है. लेकिन अमेरिका का मानना था कि इस नाजुक मोड़ पर गालिबाफ और अराघची को निशाना बनाना भारी पड़ सकता है. ये दोनों ही वो शख्सियतें हैं जो अमेरिका के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दोबारा बातचीत का रास्ता साफ करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

जब पाकिस्तान के आसमान में मंडराया खतरा

आपको बता दें कि अप्रैल के महीने में जब गालिबाफ और अराघची अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस से मिलने पाकिस्तान के इस्लामाबाद गए, तो सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए, जो पहले कभी नहीं देखे गए. ईरान ने कतर और पाकिस्तान के जरिए अमेरिका से पुख्ता गारंटी मांगी थी कि इजरायल उनके डेलिगेशन पर कोई हमला नहीं करेगा.

इस बीच पाकिस्तानी फाइटर जेट्स ने 70 से ज्यादा लोगों से भरे ईरानी विमान को अपनी सीमा में एस्कॉर्ट किया. लेकिन असली खेल वापसी के समय शुरू हुआ. जब विमान तेहरान लौट रहा था, तभी इजरायली हमले का इनपुट मिला. आनन-फानन में पायलट को विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. इसके बाद पूरे डेलिगेशन को करीब 8 घंटे का सफर सड़क मार्ग से तय कर सुरक्षित तेहरान पहुंचाया गया.

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