US-Israel and Iran War: अमेरिका और इजरायल से जंग के बीच अब ईरान अकेला पड़ता दिखाई दे रहा है, क्योंकि अरब और यूरोप समेत करीब 10 से अधिक से अधिक देश अमेरिका के सपोर्ट में उतर आए है. इतना ही नहीं, इनमें से तीन यूरोपीय देशों ने तो खुले तौर पर ईरान के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है. वहीं, ईरान पर हमले को चीन, रूस और क्यूबा समेत कई देशों ने गलत बताया है, लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आया है, ऐसे में माना जा रहा है इस जंग में ईरान अकेला खड़ा है.
तीन यूरोपीय देश ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे ईरान के जवाबी हमलों को रोकने में मदद के लिए अमेरिका और भागीदारों के साथ काम करने को तैयार हैं. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने रविवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि वे अपने साथियों पर ईरान के लापरवाह हमलों से हैरान हैं, जिससे उनके सैनिकों और इलाके के नागरिकों को खतरा है.
अमेरिका के साथ काम करने को सहमत हुए तीनों देश
तीनों देशों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि हम अपने और इलाके में अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएंगे, शायद ईरान की मिसाइलों और ड्रोन को उनके स्रोत पर फायर करने की क्षमता को खत्म करने के लिए जरूरी और उसी हिसाब से रक्षात्मक कार्रवाई को मुमकिन बनाकर, हम इस मामले पर अमेरिका और इलाके में साथियों के साथ मिलकर काम करने के लिए सहमत हुए हैं.
सऊदी अरब समेत कई देशों ने भी ईरान के हमलों की निंदा की
ईरान अमेरिका और खाड़ी देशों में मौजूद उसके एयरबेसों को निशाना बना रहा है. इस बीच अमेरिका बहरीन, अमेरिका, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और UAE ने संयुक्त बयान जारी किया है बयान में सातों देशों ने मिडिल ईस्ट में ईरान के ‘बिना सोचे-समझे और लापरवाही से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों’ की कड़ी निंदा की है.
उनका कहना है कि इन ‘गलत हमलों’ ने ‘इलाके को निशाना बनाया है, आम लोगों को खतरे में डाला है, और आम बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है. इन देशों ने कहा कि वे अपने नागरिकों की रक्षा के लिए एकजुट हैं. उन्होंने अपनी सुरक्षा के अधिकार को भी मजबूती से दोहराया.
ईरान के समर्थन में कितने देश, क्या चीन और रूस देंगे साथ?
वहीं, ईरान के समर्थन में भी कई देश हैं. हिजबुल्लाह, हूती और शिया मिलिशिया जैसे संगठन भी उतर आए हैं, जो लगातार इजरायल और अमेरिकी एयरबेसों पर हमले कर रहे हैं. लेकिन यूरोपीय और अरब देशों के मुकाबले ईरान समेत ये संगठन काफी कमजोर माने जा रहे हैं. अब सभी की नजर चीन, रूस, दक्षिण कोरिया, क्यूबा और वेनेजुएला पर भी है. इनमें चीन और रूस पर ज्यादा नजर है.
दरअसल, चीन और रूस अभी तक खुलकर ईरान के साथ नहीं आए है, लेकिन अमेरिका और चीन की कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे हैं. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर आने वाले दिनों में ईरान कमजोर पड़ता है चीन और रूस भी जंग में कूद सकते हैं.
चीन और रूस ने खामेनेई की हत्या को बताया गलत
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या को ‘घृणित हत्या’ बताते हुए का था कि ये ‘मानवीय नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी मानकों’ का खुला उल्लंघन है. चीन सरकार ने भी खामेनेई पर हमले पर कड़े शब्दों में निंदा की थी. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है.
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