US Iran Israel War: जंग के बीच ईरान ने बुधवार को इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोपी कुरोश कीवानी को फांसी दे दी है. ईरान की न्यायपालिका की मिजान न्यूज एजेंसी के अनुसार इजरायल की जासूसी एजेंसी मोसाद को ईरान में संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और जानकारी प्रदान करने का दोषी पाया गया था.
खुफिया ऑपरेशन को सुविधाजनक बनाने का आरोप
इजरायल के साथ एक दशक से युद्ध में उलझे ईरान ने मोसाद से संबंध रखने और देश के अंदर उसके खुफिया ऑपरेशन को सुविधाजनक बनाने का आरोप लगाते हुए कई लोगों को मौत की सजा दी है. जब जब जंग छिड़ती है तब ऐसी फांसी की सजा में और तेजी आती है. जेरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले ईरान के इस्लामिक शासन ने 28 जनवरी को जंग शुरू होने से एक महीने पहले इजरायली जासूस को फांसी के फंदे पर लटकाया था.
सबसे बड़ा कारण शक्तिशाली खुफिया एजेंसी मोसाद
तब भी ईरानी न्यायपालिका के मीडिया आउटलेट ने कहा था कि हामिद्रेजा सबेट एस्माईलिपुर नाम के एक व्यक्ति को मोसाद एजेंट होने के कारण मौत के घाट उतारा गया था. इजरायल की ताकत के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी शक्तिशाली खुफिया एजेंसी मोसाद है. इसे दुनिया की सबसे प्रभावी खुफिया एजेंसी में से एक माना जाता है. मोसाद ऐसे जासूसों की मदद से ही ईरान के अंदर जासूसी करने, आतंकवादी गतिविधियां रोकने, गुप्त अभियान चलाने और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में माहिर है.
सुप्रीम लीडर की मौत के बाद दूसरा सबसे बड़ा झटका
दशकों से मोसाद ने इजरायल में पहुंचने से पहले खतरों को बेअसर करने के लिए अपने देश के बॉर्डर से बाहर भी अत्यधिक जटिल ऑपरेशन किए हैं. एक दिन पहले 17 मार्च को ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी को इजरायल ने एक हमले में मार गिराया. इसे ईरान के लिए सुप्रीम लीडर की मौत के बाद दूसरा सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है. इस हमले को अंजाम देने से पहले इजरायल को इनपुट ईरान की राजधानी तेहरान के अंदर से ही आया था.
बहुमूल्य जानकारी की बदौलत संभव
ईरान इंटरनेशनल से इसको लेकर एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट छापी है. इसके अनुसार एक इजरायली अधिकारी ने ईरान इंटरनेशनल को बताया कि लारिजानी की हत्या पिछले 24 घंटों में ईरान की राजधानी तेहरान के निवासियों की ओर से इजरायल की खुफिया एजेंसियों को मिली बहुमूल्य जानकारी की बदौलत संभव हुई. यह मोसाद की ताकत है.
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