US Troop Presence : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ ईरान के साथ बातचीत पर जोर दे रहे हैं और दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में वह अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि रक्षा विभाग मिडिल ईस्ट में 10 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती पर विचार कर रहा है. यह टुकड़ी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के अतिरिक्त होगी, जिसे पहले ही इस क्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया गया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार 10 हजार सैनिकों की तैनाती पर अभी फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन अगर इन सैन्य बलों को वहां भेजा जाता है, तो इस तरह कम से कम 17 हजार अमेरिकी सैन्य पश्चिम एशिया में भेजे जाएंगे. बता दें कि ये सैनिक उन 40 से 50 हजार अमेरिकी सैनिकों के अतिरिक्त हैं, जो पहले से ही वहां तैनात हैं.
दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट की भी तैनाती
इसके साथ ही अमेरिका सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के कम से कम एक हजार सैनिकों को तैनात करने की तैयारी कर रहा है. साथ ही पेंटागन दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट की भी तैनाती प्रक्रिया में है, जिसके तरह यहां करीब पांच हजार मरीन और नौसेना के हजारों अन्य कर्मी तैनात किए जाएंगे.
ईरान के एनर्जी सेक्टर पर रोके गए हमले
बताया जा रहा है कि यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप तेहरान के साथ बातचीत करने पर जोर दे रहे हैं और इतना ही नही बल्कि उन्होंने 10 दिनों के लिए ईरान के एनर्जी सेक्टर पर हमले रोक दिए हैं. 6 अप्रैल तक यह रोक जारी रहेगी. इससे पहले 27 मार्च को ट्रंप ने हमलों की डेडलाइन 5 दिनों के लिए रोकी थी. ऐसे में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के मध्यस्थों का कहना है कि तेहरान ने अतिरिक्त समय नहीं मांगा है, लेकिन ट्रंप ने दावा करते हुए कहा कि ईरान के कहने पर यह समयसीमा बढ़ाई गई है.
‘हमसे समझौता करने की भीख मांग रहा है‘
इसके साथ ही ट्रंप ने सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट के दौरान ईरानी नेताओं से बात शुरू करने को कहा था और ये भी कहा था कि बहुत देर होने से पहले बातचीत शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि एक बार ऐसा हो जाने पर पीछे मुड़ने का रास्ता नहीं होगा. इतना ही नही बल्कि इसके पहले भी ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा था कि दोनों देश समझौते के करीब हैं. उनका कहना है कि अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना को ईरान की ओर से अस्वीकार किए जाने के बाद तेहरान ‘हमसे समझौता करने की भीख मांग रहा है.’
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