ट्रंप के कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा, ईरान जंग के बीच आंदोलन से हिला अमेरिका

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USA No Kings Protest : वर्तमान में अमेरिका इस समय दो बड़े मोर्चों पर जूझ रहा है. एक ओर पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ जारी जंग में हजारों लोगों की जान जा चुकी है, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार अमेरिका के सभी 50 राज्यों में शनिवार को “नो किंग्स” यानी “कोई राजा नहीं” के बैनर तले हजारों रैलियां आयोजित की गईं. बता दें कि इस आंदोलन की गूंज अमेरिका के साथ यूरोप, लैटिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी लोग सड़कों पर उतरकर विरोध करते नजर आए.

जानकारी के मुताबिक, यह “नो किंग्स” आंदोलन की तीसरी बड़ी रैली थी. बता दें कि जून में करीब 50 लाख और अक्टूबर में 70 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि इस आंदोलन में करीब 90 लाख लोग शामिल है. मीडिया के मुताबिक, पूरे देश में 3,100 से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो अक्टूबर की तुलना में 500 अधिक हैं. विशेष रूप से इन रैलियों में से दो-तिहाई छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में आयोजित हुईं, जिससे स्‍पष्‍ट है कि आंदोलन अब हर वर्ग तक पहुंच चुका है.

लोगों की हिम्मत देश के लिए उम्मीद की किरण

मीडिया रिपोर्ट ने जानकारी दी कि इस बार की सबसे बड़ी रैली सेंट पॉल में हुई, जिसे राष्ट्रीय मुख्य कार्यक्रम घोषित किया गया था. यहां मशहूर रॉक गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने “स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस” नाम का नया गीत प्रस्तुत किया. बता दें कि उनका यह गाना रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी की याद में लिखा गया था, जो कि अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंटों की गोलीबारी में मारे गए थे. इस मामले को लेकर स्प्रिंगस्टीन का कहना है कि मिनेसोटा के लोगों की हिम्मत और एकजुटता पूरे देश के लिए उम्मीद की किरण है.

कार्यक्रम में शामिल कई बड़े नाम

जानकारी के मुताबिक, इस कार्यक्रम में कई बड़े नाम शामिल हुए, जिनमें अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो, अभिनेत्री जेन फोंडा, गायिका जोन बेज और सीनेटर बर्नी सैंडर्स शामिल रहे. इसके साथ ही कैपिटल की सीढ़ियों पर एक बड़ा बैनर लगाया गया, जिस पर लिखा था, “हमारे पास सीटियां थीं, उनके पास बंदूकें. क्रांति मिनियापोलिस से शुरू होती है.”

इन मुद्दों पर भड़के प्रदर्शनकारी

बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों की नाराजगी कई मुद्दों पर सामने आई. इसमें सबसे बड़ा मुद्दा ट्रंप प्रशासन का आक्रामक इमिग्रेशन अभियान रहा, इसके साथ ही मिनेसोटा में जहां इमिग्रेशन एजेंटों की कार्रवाई से लोगों में डर का माहौल है. इसके अलावा ईरान के खिलाफ चल रही जंग का भी विरोध किया गया. ट्रांसजेंडर अधिकारों में कटौती और अमीरों के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को लेकर भी लोगों ने आवाज उठाई.

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