53 साल बाद US हटाएगा सुपरसोनिक उड़ानों से प्रतिबंध, ऐसे विमानों के लिए ध्वनि-आधारित मानक भी तय

Washington: अमेरिका ध्वनि की गति से तेज उड़ान भरने वाले ‘सुपरसोनिक’ विमानों पर पांच दशक से अधिक समय से लागू प्रतिबंध को हटाने जा रहा है. इसके लिए नए नियमों का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें ऐसे विमानों के संचालन के लिए ध्वनि-आधारित मानक तय किए गए हैं. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा प्रायोगिक ‘एक्स-59’ विमान का सफल परीक्षण किए जाने के बाद अमेरिकी परिवहन विभाग ने मंगलवार को यह पहल की.

ध्वनि विस्फोट अत्यधिक तेज

नासा के इस विमान ने तेज ध्वनि विस्फोट (सोनिक बूम) उत्पन्न किए बिना ध्वनि की गति से भी तेज उड़ान भरने का प्रदर्शन किया. आमतौर पर ‘सुपरसोनिक’ उड़ानों के दौरान उत्पन्न होने वाला ध्वनि विस्फोट अत्यधिक तेज होता है, जिससे इमारतों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है. अमेरिका के संघीय विमानन प्रशासन (FAA) के प्रस्तावित नियम का उद्देश्य वर्ष 1973 से सुपरसोनिक उड़ानों पर लगे प्रतिबंध की जगह ध्वनि की अधिकतम सीमा पर आधारित नया नियम लागू करना है.

अधिक रफ्तार से उड़ान भरने की अनुमति

प्रस्ताव के अनुसार, विमानों को जमीन के ऊपर मैक-1 (ध्वनि की गति, लगभग 767 मील प्रति घंटा) से अधिक रफ्तार से उड़ान भरने की अनुमति होगी, बशर्ते उनकी उड़ान से उत्पन्न होने वाला शोर निर्धारित सीमा से अधिक न हो. एफएए इस वर्ष के अंत तक एक और नियम प्रस्तावित कर सकता है, जिसमें सुपरसोनिक विमानों के उड़ान भरने और उतरने के दौरान उत्पन्न होने वाले शोर के मानक तय किए जाएंगे. इन दोनों नियमों को वर्ष 2027 के मध्य तक अंतिम रूप दिया जा सकता है.

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