अमेरिका से पाकिस्तान के तानाशाही पर कड़े कदम उठाने की मांग, 42 अमेरिकी सांसदों ने रुबियो को लिखा पत्र

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Washington: अमेरिका से पाकिस्तान में हो रहे दमनकारी और तानाशाही अभियानों पर कड़े कदम उठाने की मांग की गई है. इसके लिए भारतीय मूल की अमेरिकी कांग्रेस सदस्य महिला प्रमिला जयपाल और कांग्रेस सदस्य ग्रेग कैसर के नेतृत्व में करीब 42 टॉप अमेरिकन सांसदों ने अमेरिकी मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखा है. सांसदों ने खास तौर पर पाकिस्तानी सेना के आलाकमान असीम मुनीर की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. सांसदों ने मुनीर को इस कार्रवाई का मुख्य हिस्सा बताया.

क्या ट्रंप ने मानवाधिकार की चिंताओं को उठाया था?

सांसदों ने यह भी पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने सितंबर में पीएम शहबाज शरीफ और जुलाई में मुनीर के साथ अपनी मुलाकात के दौरान मानवाधिकार की चिंताओं को उठाया था? सांसदों ने रुबियो से अपील की है कि वे पाकिस्तान में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय दमनकारी अभियान और सुनियोजित मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें. सांसदों का कहना है कि पाकिस्तान तानाशाही के बढ़ते संकट का सामना कर रहा है.

पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व को जवाबदेह ठहराने की जिम्मेदारी

स्थानीय समयानुसार सांसदों ने बुधवार को दावा किया कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाओं और बुनियादी स्वतंत्रता को सुनियोजित तरीके से खत्म किया जा रहा है. पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व को जवाबदेह ठहराने की जिम्मेदारी और तरीके अमेरिका के पास हैं. सभी सांसदों ने 3 दिसंबर के एक चिट्ठी में लिखा कि हम सरकार से अपील करते हैं कि वह उन अधिकारियों के खिलाफ वीजा बैन और संपत्ति जब्त करने जैसे कदम तेजी से लागू करे, जो सुनियोजित तरीके से दमन, अंतर्राष्ट्रीय दमन कर रहे हैं और न्यायिक आजादी को कमजोर कर रहे हैं.

पाकिस्तान में उनके परिवारों तक भी पहुंच जाती हैं ये धमकियां

सांसदों ने लिखा कि हाल के सालों में पाकिस्तान में तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाने वाले अमेरिकी नागरिकों और निवासियों को धमकियों, डराने-धमकाने और परेशान करने का सामना करना पड़ा है. ये धमकियां अक्सर पाकिस्तान में उनके परिवारों तक भी पहुंच जाती हैं. चिट्ठी में यह भी साफ करने की मांग की गई है कि किन हालात में बैन लगेंगे. अमेरिका के लोगों के खिलाफ खतरों का जवाब देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और पाकिस्तानी सेना के साथ अमेरिका का जुड़ाव कैसे सत्तावादी तरीकों का समर्थन करने से बचेगा.

इमरान खान और दूसरे राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग

उन्होंने लिखा कि ऐसे कदम पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और दूसरे राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग के साथ मानवाधिकारों के लिए अमेरिका के वादे को और मजबूत करेंगे. अमेरिकी नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचाएंगे और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देंगे. चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, रशीदा तलीब, जेमी रस्किन, यवेट डी. क्लार्क, मैडेलीन डीन, लॉयड डॉगेट, जान शाकोव्स्की, एरिक स्वालवेल, बेनी जी थॉम्पसन, जूडी चू, जो लोफग्रेन, सारा मैकब्राइड, समर ली, इल्हान उमर और मैक्सिन वाटर्स शामिल थे.

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