बांग्लादेश में विदेशी फंडिंग से हुआ था तख्तापलट! रिपोर्ट में खुलासा

Raginee Rai
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bangladesh: बांग्लादेश में पिछले साल हुए तख्तापलट के पीछे विदेशी फंडिंग की भूमिका सामने आई है. प्रदर्शनकारी नेताओं ने बड़ी मात्रा में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग का शक उत्‍पन्‍न हुआ है. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस आंदोलन के लिए विदेशों से फंडिग की गई थी, जिसके बाद कई नेताओं ने भारी मात्रा में बिटक्वाइन में निवेश किया है.

ADSM लीडर ने क्रिप्टोकरेंसी टेथर में निवेश किए  

एडीएसएम (ADSM) लीडर और ‘जातीय नागरिक कमेटी’ के संस्थापक सरजिस आलम ने 7.65 मिलियन डॉलर (65 करोड़ रुपये) क्रिप्टोकरेंसी टेथर (Tether) में निवेश किए. सामान्य परिवार से आने वाले आलम का इतनी बड़ी संख्या में इंवेस्‍ट करना विदेशी फंडिंग की ओर संकेत कर रहा है.

अंतरिम सरकार में आईटी एडवाइजरी और एडीएसएम कोऑर्डिनेटर नाहिद इस्लाम ने 204.64 बिटकॉइन (BTC) का निवेश किया है, जिसकी कीमत 17.14 मिलियन डॉलर यानी 147 करोड़ रुपये है. इस भारी निवेश ने उनके पैसे के सोर्स पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इन नेताओं के अलावा भी कई छात्र नेताओं ने भी इंवेस्‍ट किया है.

विदेशी फंड से हुआ था बांग्लादेश में आंदोलन

बांग्‍लादेश के अंतरिम सरकार के प्रेस सचिव और पत्रकार शफीकुल आलम के पास 93.06 बिटकॉइन हैं. इसकी कीमत 10 मिलियन डॉलर (86 करोड़ रुपए) है. इससे यह साफ है कि आंदोलन से जुड़े लोगों को विदेश से फंड मिला हुआ है.

यह खुलासा हुआ है कि बांग्लादेश में नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को विदेशी धन से वित्त पोषित किया गया था, जिसके बाद ही बांग्लादेश में विद्रोह प्रदर्शन को अंजाम दिया गया. बांग्लादेश आंदोलन, जिसे कभी परिवर्तन के लिए छात्रों के नेतृत्व वाला प्रयास माना जाता था, अब विदेशी वित्तपोषण के आरोपों का सामना कर रहा है.

तख्तापलट के बाद आंदोलन शांत

साल 2024 के अगस्त माह में बांग्लादेश में छात्रों ने आरक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. उस आंदोलन के वजह से तत्कालीन पीएम शेख हसीना को अपना पद छोड़ना पड़ा और देश छोड़कर भारत आना पड़ा. हसीना सरकार के गिरने के बाद आंदोलन धीरे-धीरे बंद हो गया.

अब बांग्लादेश का नेतृत्व अंतरिम सरकार के हाथों में है. उम्मीद थी कि इस बीच चुनाव हो जाएंगे और नई लोकतांत्रिक सरकार सत्ता में आएगी, मगर ऐसा अभी तक नहीं हुआ है. जो छात्र सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते थे, उन्होंने एक राजनीतिक पार्टी बना ली है. यही वजह है कि कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.

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