ईरान में अब किसी को नहीं मिलेगी इंटरनेट सुविधा, डगमगा सकती है देश की अर्थव्यवस्‍था!

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Iran internet shutdown: ईरान में इस समय विरोध प्रदर्शन चरम पर है. इसी बीच ईरानी सरकार एक ऐसे फैसले की ओर बढ़ रही है, जिससे देश के आम नागरिकों का दुनिया से डिजिटल संपर्क लगभग पूरी तरह टूट सकता है. दरअसल, डिजिटल अधिकारों पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार वैश्विक इंटरनेट को आम लोगों का हक नहीं, बल्कि एक सरकारी सुविधा बनाने की तैयारी में है,यदि ऐसा होता है, तो अधिकतर ईरानी नागरिक सिर्फ सरकार के बनाए हुए राष्ट्रीय इंटरनेट का ही इस्तेमाल कर पाएंगे.

इंटरनेट वापसी की कोई उम्‍मीद नहीं

इंटरनेट सेंसरशिप पर नजर रखने वाली संस्था फिल्टरवॉच के अनुसार, यह योजना गुप्त रूप से लेकिन लंबे समय के लिए बनाई जा रही है. इसके मुताबिक आगे चलकर सिर्फ वही लोग वैश्विक इंटरनेट चला सकेंगे, जिन्हें सरकार की तरफ से सुरक्षा मंजूरी मिलेगी या जो सरकारी जांच में पास होंगे. सरकारी संकेतों से यह भी साफ है कि 2026 के बाद खुले इंटरनेट की वापसी की कोई उम्मीद नहीं है.

20 मार्च तक बंद रहेगा इंटरनेट

बता दें कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बाद 8 जनवरी से अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद है. इन प्रदर्शनों में हजारों लोगों के मौत होने की खबर सामने आई है. ये इंटरनेट बंदी इतनी लंबी और सख्त है कि इसकी तुलना 2011 में मिस्र में हुए तहरीर स्क्वायर आंदोलन से भी की जा रही है. सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कम से कम 20 मार्च तक बंद रहेगा.

चुनिंदा लोगों को ही मिलेगी इंटरनेट की छूट

कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पहले से ही एक खास तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे व्हाइटलिस्टिंग कहा जाता है. इसके तहत कुछ चुने हुए लोगों को ही सीमित और फिल्टर किया हुआ वैश्विक इंटरनेट मिलता है, जबकि बाकी लोग पूरी तरह कटे रहते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि इसमें चीन की उन्नत तकनीक का इस्तेमाल हुआ है जिससे सरकार पूरे देश के इंटरनेट ट्रैफिक पर नजर रख सकती है.

अर्थव्यवस्था और समाज पर पड़ेगा असर

इसी बीच, अमेरिकी विदेश विभाग के एक पूर्व अधिकारी ने इस योजना को डराने वाली और बहुत महंगी बताते हुए कहा कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होगा और दुनिया से उसका सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव भी टूट जाएगा. डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकार को भले ही फिलहाल हालात पर नियंत्रण मिल जाए, लेकिन लंबे समय में इसकी कीमत देश और जनता दोनों को चुकानी पड़ेगी.

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