Budget 2026: जनता की सेहत पर भी सरकार गंभीर, जंक फूड पर सख्ती, बच्चों को टारगेट करने वाले विज्ञापनों पर बैन लगाने की तैयारी!

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Budget 2026 Live: केंद्र सरकार के बजट में टैक्स, महंगाई और विकास के साथ-साथ इस बार लोगों की नजर सेहत से जुड़े फैसलों पर भी टिकी हुई है. इसमें जंक फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड बर्गर, पिज्जा, नूडल्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स को खाने को लेकर सरकार गंभीर दिख रही है. लोगों का वजन और बीमारियां भी बढ़ रही हैं. लोकसभा में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में सरकार ने साफ कहा है कि जंक फूड अब सिर्फ खाने का नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य का संकट बन चुका है.

जंक फूड के विज्ञापनों पर रोक

इससे निपटने के लिए सरकार ने बड़ा कदम सुझाया है. सर्वे के मुताबिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड यानी जंक फूड के विज्ञापनों पर सुबह 6 से रात 11 बजे तक सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाई जानी चाहिए. खासतौर पर बच्चों को टारगेट करने वाले विज्ञापनों पर सख्ती होगी. अत्यधिक वजन वाले पांच साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या 2015-16 में 2.1% थी जो 2019-21 में बढ़कर 3.4% हो गई.

24% महिलाएं और 23% पुरुष ओवरवेट

2020 में 3.3 करोड़ बच्चे मोटापे से प्रभावित थे और अनुमान है कि 2035 तक यह आंकड़ा 8.3 करोड़ तक बढ़ जाएगा. वयस्कों में भी 24% महिलाएं और 23% पुरुष ओवरवेट हैं. सरकार ने यह भी सुझाया है कि उच्च  फैट, शुगर और नमक वाले खाद्य पदार्थों परफ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग और स्वास्थ्य चेतावनी लागू की जाए. शिशु और टॉडलर दूध व पेय पदार्थों पर भी मार्केटिंग प्रतिबंध की सिफारिश की गई है. चिली, नॉर्वे और ब्रिटेन पहले ही ऐसे कानून लागू कर चुके हैं.

भारत में विज्ञापन नियम अभी भी अस्पष्ट

ब्रिटेन ने टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रात 9 बजे से पहले जंक फूड विज्ञापन पर रोक लगाई, जिससे बच्चों में मोटापे की समस्या कम हो सके. भारत में विज्ञापन नियम अभी भी अस्पष्ट हैं. विज्ञापन कोड भ्रामक या अस्वस्थ विज्ञापनों पर रोक लगाता है लेकिन भ्रामक की स्पष्ट परिभाषा नहीं है. इसी तरह CCPA के दिशानिर्देशों में स्पष्ट पोषण मानक नहीं हैं, जिससे कंपनियां अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के विज्ञापन में ढीली स्वास्थ्य या ऊर्जा संकेत दिखा सकती हैं.

पुरुष और महिलाओं में मोटापा लगभग दोगुना

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बिक्री 2009 से 2023 तक 150% बढ़ी. रिटेल बिक्री 2006 में $0.9 बिलियन से बढ़कर 2019 में लगभग $38 बिलियन हो गई. इसी अवधि में पुरुष और महिलाओं में मोटापा लगभग दोगुना हो गया. सरकार का कहना है कि सिर्फ उपभोक्ता व्यवहार बदलने से समस्या नहीं सुलझेगी. इसके लिए खाद्य प्रणाली में नीतिगत सुधार, उत्पादन पर नियंत्रण और स्वास्थ्यवर्धक आहार को बढ़ावा देना जरूरी है.

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