Nifty 50 results Q3: इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तिमाही में निफ्टी 50 कंपनियों की आय में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि, पिछले 13 तिमाहियों में यह पहला मौका है जब कुल मुनाफे में गिरावट देखने को मिली. बैंकों, वित्तीय सेवाओं और तेल-गैस क्षेत्र को अलग रखने पर कंपनियों की आय में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो मार्च 2023 के बाद पहली बार दोहरे अंकों की बढ़ोतरी है. इसके बावजूद भारत के नए श्रम कानूनों के एकमुश्त लेखा प्रभाव के कारण समग्र मुनाफे में कमी आई.
परिचालन लाभ बढ़ा, शुद्ध लाभ घटा
परिचालन लाभ में वार्षिक आधार पर 7.5% की वृद्धि हुई, यह सितंबर तिमाही में 6.1% और एक वर्ष पहले की अवधि में 5% थी. इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक, आय में वृद्धि के बावजूद, निफ्टी 50 की 37 कंपनियों का कुल शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की तुलना में 8.1% गिर गया, जो सितंबर 2022 तिमाही के बाद पहली बार नकारात्मक लाभ वृद्धि को दर्शाता है. विश्लेषकों ने मुनाफे में गिरावट का कारण भारत के नए श्रम कानूनों के एकमुश्त अकाउटिंग प्रभाव को बताया, जिसके तहत मूल वेतन को कुल लागत-से-कंपनी के 50% तक बढ़ाना अनिवार्य है, साथ ही ग्रेच्युटी प्रावधानों में भी वृद्धि की गई है.
श्रम संहिता और आईटी सेक्टर पर असर
विश्लेषकों के अनुसार, श्रम संहिता में हुए बदलावों के चलते कर पश्चात कुल लाभ में लगभग 5 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में मुनाफे में करीब 13 प्रतिशत गिरावट का अनुमान लगाया गया है. वहीं वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में आय वृद्धि की रफ्तार तेज हुई और यह 16 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई, खासकर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती लागू होने के बाद. नवंबर में नई श्रम संहिता लागू की गई, जिसके तहत वेतन संरचना, कार्यस्थल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई प्रावधानों में बदलाव किए गए.
विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, टीसीएल, इंफोसिस और एचसीएल जैसी कंपनियों ने इन नियमों के पालन के लिए 4,373 करोड़ रुपये से अधिक का एकमुश्त खर्च उठाया, जिससे तिमाही मुनाफे में दोहरे अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

