‘युद्ध के बीच खाड़ी देशों से रुक सकती है तेल-गैस की सप्लाई!’ कतर ने दुनिया को दी बड़ी चेतावनी

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Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में अगर यह युद्ध जारी रहा तो आने वाले कुछ हफ्तों में खाड़ी देशों से तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह से रुक सकती है, जिसका सीधा असर पूरी दुनिया की इकॉनमी पर पड़ेगा. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद अल-काबी ने यह चिंताजनक चेतावनी दी है. दुनिया के दूसरे सबसे बड़े LNG प्रोड्यूसर कतर को अपने रास लफ्फान प्लांट पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ा है.

9,000 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला

सुरक्षा कारणों से प्लांट में काम रोक दिया गया है और करीब 9,000 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. एनर्जी मिनिस्टर ने साफ किया कि जब तक युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और सेना हरी झंडी नहीं दे देती, तब तक प्रोडक्शन फिर से शुरू नहीं होगा. एनर्जी मिनिस्टर ने अनुमान लगाया है कि तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.

युद्ध से पहले के लेवल से चार गुना बढ़ने का खतरा

इसके अलावा गैस की कीमतों के भी युद्ध से पहले के लेवल से चार गुना बढ़ने का खतरा है. उन्होंने कहा कि अगर युद्ध अभी खत्म भी हो जाता है तो भी कतर को सप्लाई के नॉर्मल साइकिल पर लौटने में कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं. दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से सप्लाई होता है, लेकिन अब जहाज का ट्रैफिक लगभग रुक गया है.

हमला करने के बाद यह इलाका बन गया वॉर जोन

US और इजरायल के ईरान पर हमला करने के बाद यह इलाका वॉर जोन बन गया है और अब तक 10 जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है. कतर के मुताबिक अब जहाज मालिकों के लिए अपने जहाजों और क्रू को इस खतरनाक रास्ते पर भेजना मुमकिन नहीं है. युद्ध जारी रहने से दुनिया भर में GDP ग्रोथ रेट पर बुरा असर पड़ेगा. एनर्जी के साथ-साथ फर्टिलाइजर और दूसरे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई भी रुक जाएगी.

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