सत्य और श्रेष्ठ व्यवहार से ही होता है जीवन का कल्याण: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, परमार्थ सहज है, व्यवहार कठिन है। अपकीर्ति वाला मनुष्य जीवित होने पर भी मरे हुए के समान है। सेवा-पूजा में भूल होने पर परमात्मा क्षमा कर देते हैं, पर व्यवहार में भूल होने पर लोग क्षमा नहीं करते हैं। अपना व्यवहार भक्तिमय बनाओ।
व्यवहार में झूठ बोलने से लाभ के बदले हानि ज्यादा होती है। श्री कबीर दास जी महाराज कपास की रूई से धागा बना रहे थे। तब तक चार लोग उनके पास आए और उन लोगों ने कहा कि हम चोर हैं। हम आपकी शरण में आये हैं। जीवन में जो कुछ हुआ, अब नहीं होगा। हम कभी कुछ भी गलत नहीं करेंगे। सत्य ही करने का संकल्प ले रहे हैं। हमारे पीछे गांव के लोग लगे हैं, हमें बचा लो।
श्री कबीर साहेब ने कहा- अगर ऐसी बात है इसी रूई के ढेर में छुप जाओ। चोरों ने पूछा गांव के लोग जब आपसे पूछेंगे, तो आप बता तो नहीं दोगे।श्री कबीर साहेब ने कहा- मैं झूठ नहीं बोलता, अगर कोई पूँछेगा तो मैं सही ही बोलूंगा। लेकिन उन लोगों के पास कोई उपाय भी नहीं था। उन्होंने सोचा महात्मा दयालु होते हैं हमारी रक्षा में झूठ बोल देंगे। सब रूई के ढेर में छुप गये। पीछे गांव वाले लोग आये,उन सबने कबीर साहब से कहा कि- इधर चार लोग आये?
आपने देखा? कबीर साहब ने कहा- देखा, लोगों ने पूछा कहां गये? कबीर साहेब ने कहा इसी रूई के ढेर में छिपे हैं। गांव के लोगों ने मन में सोचा! चोर तो कहीं भाग गये होंगे। लेकिन महात्मा दयालु होते हैं, ये हमको रूई का ढेर पलटने में लगा देंगे ताकि वे सब बच जाएं। गांव के लोग चोरों को ढूंढने चले गए, तब वे सब बाहर निकले और उन्होंने कहा कि- आपने सत्य बताया फिर भी हमारे प्राण बच गए।
श्री कबीर साहेब ने कहा- अगर असत्य बोलने से प्राण बचते हैं तो सत्य बोलने से अवश्य बचेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है। सत्य कमजोर नहीं है, सत्य के प्रति सदैव निष्ठा रखना चाहिए। हालांकि सत्य का प्रयोग दूसरों को नीचा दिखाने के लिए नहीं करना चाहिए। जब हम सत्य का प्रयोग दूसरों को नीचा दिखाने,निर्दोष को कष्ट पहुंचाने या हानि पहुंचाने के लिए करते हैं। तो हमारा सत्य अच्छा नहीं है।
सत्य हमारा जीवन होना चाहिए, सत्य हमारा चिंतन, हमारी क्रिया में सत्य होना चाहिए। केवल दूसरों के लिए ही सत्यवादी बनना अच्छा नहीं है। हमें जो कुछ बनना है वह अपने लिए बनना है। जब हम अपने लिए अच्छा बनेंगे और हम सब अच्छे बनेंगे तो पूरे जगत का कल्याण होगा, इसमें संदेह नहीं है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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