सरकार ने ALMM फ्रेमवर्क का सोलर इनगोट्स और वेफर्स तक किया विस्तार, 1 जून 2028 से होगा लागू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Solar Policy Update: सरकार ने सोलर सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. बुधवार को केंद्र ने एप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM) फ्रेमवर्क का दायरा बढ़ाते हुए इसे सोलर इनगोट्स और वेफर्स तक विस्तार दे दिया है. यह नया नियम 1 जून 2028 से लागू होगा.

अब अपस्ट्रीम कंपोनेंट्स भी दायरे में

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने इनगोट्स और वेफर्स के लिए ALMM सूची-III लागू कर दी है. इससे अब घरेलू सोर्सिंग की अनिवार्यता सिर्फ मॉड्यूल और सेल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सोलर वैल्यू चेन के अपस्ट्रीम हिस्सों तक भी बढ़ेगी. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पहले से चल रही परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए ग्रैंडफादरिंग प्रावधान लागू किए गए हैं, ताकि उन पर नए नियमों का नकारात्मक असर न पड़े.

प्रल्हाद जोशी का बयान

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि इस कदम से घरेलू सौर ऊर्जा उत्पादन को मजबूती मिलेगी, आयात पर निर्भरता कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता में सुधार होगा. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि एएलएमएम फ्रेमवर्क का विस्तार करके इसमें इनगोट्स और वेफर्स को शामिल करना आत्मनिर्भर सोलर एनर्जी इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है और इससे भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक मजबूत वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित होगा.

नए नियमों में क्या होगा बदलाव

नए फ्रेमवर्क के तहत नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस सहित सभी सोलर परियोजनाओं को प्रभावी तिथि के बाद ALMM सूचीबद्ध वेफर्स का उपयोग करना अनिवार्य होगा. वेफर्स के लिए कट-ऑफ डेट, प्रारंभिक ALMM सूची-III के प्रकाशन के सात दिन बाद तय की गई है. इसके बाद विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 63 के तहत आने वाली सभी बोलियों में ALMM-अनुरूप वेफर्स का उल्लेख जरूरी होगा.

घरेलू उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ALMM सूची-III तभी जारी होगी जब कम से कम तीन स्वतंत्र निर्माता, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 15 गीगावॉट हो, सक्रिय हों. इसके साथ ही, वेफर्स सूची में शामिल होने के इच्छुक निर्माताओं के पास समान क्षमता वाली इनगोट निर्माण सुविधा भी होना जरूरी होगा.

2028 के बाद और सख्त होंगे नियम

मंत्रालय के अनुसार, जून 2028 से ALMM सूची-I में केवल उन्हीं सोलर मॉड्यूल्स को शामिल किया जाएगा, जो ALMM सूचीबद्ध सेल और वेफर्स से बने होंगे. हालांकि, पहले से चल रही परियोजनाओं के लिए अलग व्यवस्था जारी रहेगी. सोलर विनिर्माण में वेफर्स एक अहम कड़ी हैं और फिलहाल भारत इस क्षेत्र में आयात पर काफी निर्भर है. सरकार का मानना है कि इस फैसले से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, सप्लाई चेन मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

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