रुपए में गिरावट वैश्विक रुझानों के अनुरूप, 700 अरब डॉलर का भंडार मजबूत

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Rupee Update:भारतीय रुपए में हालिया गिरावट को लेकर सामने आई चिंताओं के बीच एक अहम रिपोर्ट ने स्थिति को लेकर संतुलित तस्वीर पेश की है. SBI Research की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 27 फरवरी के बाद रुपए में जो गिरावट देखी गई है, वह वैश्विक मुद्रा रुझानों के अनुरूप है और कई मामलों में यह अन्य मुद्राओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद रुपए में गिरावट सीमित रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय मुद्रा अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है.

रुपए और डॉलर इंडेक्स में समान गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, 2 अप्रैल 2025 से 27 फरवरी 2026 के बीच रुपए में करीब 6.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसी अवधि में डॉलर इंडेक्स भी लगभग 6 प्रतिशत गिरा. इससे यह स्पष्ट होता है कि यह गिरावट केवल भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर मुद्रा बाजार में हो रहे बदलावों का हिस्सा है.

वैश्विक मजबूती के दौर में रुपया कमजोर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जिस समय अधिकांश मुद्राएं डॉलर के मुकाबले मजबूत हो रही थीं, उस समय रुपया अपेक्षाकृत कमजोर रहा. इस कारण यह धारणा बनी कि रुपया वैश्विक झटकों को सहने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार यह तर्क कुछ हद तक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था.

RBI के कदम और बाजार में अंतर

Reserve Bank of India द्वारा बैंकों की ओपन पोजिशन को संतुलित करने के प्रयासों को उपयोगी बताया गया है, लेकिन इससे ऑनशोर और ऑफशोर बाजारों के बीच अंतर बढ़ने की आशंका भी जताई गई है. भारतीय बैंक आमतौर पर ऑनशोर बाजार में लॉन्ग पोजिशन और ऑफशोर बाजार में शॉर्ट पोजिशन रखते हैं, जबकि विदेशी बैंक इसके उलट रणनीति अपनाते हैं. इससे बाजार में असंतुलन पैदा हो सकता है.

700 अरब डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो किसी भी प्रकार की सट्टेबाजी को रोकने और रुपए को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त है.

यह भंडार लगभग 10 महीने के आयात के बराबर है और अल्पकालिक बाहरी ऋण कुल भंडार के 20 प्रतिशत से भी कम है, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत की बाहरी स्थिति मजबूत है.

तेल कीमत और पूंजी प्रवाह बना जोखिम

हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अस्थिर पूंजी प्रवाह और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य में जोखिम पैदा कर सकती हैं. विशेष रूप से तेल विपणन कंपनियों की रोजाना 250 से 300 मिलियन डॉलर की मांग बाजार पर दबाव डाल सकती है.

नीतिगत सुझाव भी दिए गए

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इस मांग को पूरा करने के लिए एक विशेष डॉलर विंडो बनाई जानी चाहिए. इससे विदेशी मुद्रा की वास्तविक मांग और आपूर्ति को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा और बाजार में अनावश्यक अस्थिरता को कम किया जा सकेगा.

रुपए में ऐतिहासिक उछाल

इस बीच, गुरुवार को रुपए में लगभग 13 वर्षों में सबसे बड़ी एक दिवसीय मजबूती देखने को मिली और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.10 के स्तर पर बंद हुआ. यह संकेत देता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद रुपया तेजी से रिकवरी करने की क्षमता रखता है.

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