मिडिल ईस्ट युद्ध में दबकर रह गया गाजा! ट्रंप के प्लान को लगा झटका, फंड की कमी से जूझ रहा ‘बोर्ड ऑफ पीस’

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New Delhi: गाजा के फिर से निर्माण को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को 17 अरब डॉलर का वादा तो मिला, लेकिन जमीन पर हकीकत बेहद चौंकाने वाली है. 17 अरब डॉलर तो बहुत दूर की बात है, अब तक यह 1 अरब डॉलर भी नहीं पहुंचा. फंडिंग संकट का सीधा असर गाज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति (NCAG) को तैनात करने की योजनाओं पर पड़ा है.

फंड की कमी से असमर्थ

यह समिति फ़िलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स का एक US-समर्थित समूह है, जिसका मकसद हमास से नियंत्रण अपने हाथ में लेना है. रॉयटर्स ने इस मामले से परिचित एक अन्य फ़िलिस्तीनी अधिकारी के हवाले से बताया कि बोर्ड ने हमास और अन्य गुटों को सूचित किया है कि फंड की कमी के कारण गाज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति अभी इस क्षेत्र में प्रवेश करने में असमर्थ है. अधिकारी ने बताया कि दूत निकोले म्लादेनोव ने फ़िलिस्तीनी समूहों से कहा कि अभी कोई पैसा उपलब्ध नहीं है.

अरबों डॉलर देने का किया था ऐलान 

बता दें कि वॉशिंगटन में हुई हाई-प्रोफाइल बैठक में खाड़ी देशों ने अरबों डॉलर देने का ऐलान किया था, लेकिन अब वही देश पीछे हटते नजर आ रहे हैं. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मोरक्को और अमेरिका को छोड़ दें, तो बाकी देशों की जेबें अभी भी बंद हैं. यानी जो रीबिल्डिंग ऑफ गाजा का सपना दिखाया गया था, वो अब फंडिंग के अभाव में दम तोड़ता नजर आ रहा है.

अब जंग और सुरक्षा पर खर्च हो रहा है पैसा 

सबसे बड़ा झटका आया है ईरान से जुड़े युद्ध के कारण. इस संघर्ष ने पूरी तस्वीर ही बदल दी है क्योंकि जो पैसा गाजा के लिए आना था, वह अब जंग और सुरक्षा पर खर्च हो रहा है. ईरान से जुड़ी जंग ने सब कुछ प्रभावित कर दिया है.मतलब साफ है कि गाजा अब वैश्विक राजनीति की प्राथमिकता से फिसलता जा रहा है.

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