PM Modi Putin Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान उन्हें तमिल भाषा की प्रसिद्ध शास्त्रीय कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया. यह साहित्यिक उपहार ऐसे समय दिया गया, जब दोनों नेता 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बातचीत के लिए मिले. भारत इस वर्ष BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और पुतिन सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार को भारत पहुंचे.
पीएम मोदी ने पुतिन को पुस्तक भेंट करते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला और उम्मीद जताई कि यह रूसी पाठकों को प्रेरित करेगी. उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि यह पुस्तक हमारे लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने में मदद करेगी.” “तिरुक्कुरल’ महान तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की रचना है. इसमें जीवन, नैतिकता, शासन, अर्थव्यवस्था, प्रेम और मानवीय संबंधों समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर ज्ञान और विचार प्रस्तुत किए गए हैं. इसका रूसी अनुवाद दोनों देशों के बीच पुराने साहित्यिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी एक नया संदर्भ देता है.
रूसी भाषा में प्रकाशित हुआ ‘तिरुक्कुरल’
पीएम मोदी ने जिस पुस्तक को रूसी राष्ट्रपति को भेंट किया, उसे सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल ने प्रकाशित किया है. इसका रूसी भाषा में अनुवाद नायरा म्क्रतचियन ने किया है. पुस्तक भेंट करने का यह अवसर भारत और रूस के बीच जारी द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी खास रहा. एक तरफ दोनों देशों के शीर्ष नेता महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ तमिल साहित्य की एक कालजयी कृति के रूसी अनुवाद के जरिए दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को भी सामने रखा गया.
क्या है ‘तिरुक्कुरल’?
तिरुक्कुरल तमिल कवि-दार्शनिक तिरुवल्लुवर द्वारा रचित क्लासिकल तमिल साहित्य की महत्वपूर्ण कृति है. इसमें कुल 133 अध्याय और 1,330 दोहे हैं. इसकी पूरी रचना को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है.
अरम यानी धर्म
‘तिरुक्कुरल’ के शुरुआती 38 अध्याय अरम पर आधारित हैं. इनमें सदाचार, कर्तव्य, गृहस्थ जीवन और सही आचरण जैसे विषयों पर विचार दिए गए हैं.
पोरुल यानी अर्थ
अध्याय 39 से 108 तक पोरुल का हिस्सा है. इसमें समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति, राज्य संचालन और शासन व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई है.
इन्बम यानी काम
रचना के अंतिम 25 अध्याय इन्बम पर केंद्रित हैं. इनमें प्रेम, स्नेह और मानवीय रिश्तों की भावनाओं को समझने की कोशिश की गई है.
कब लिखी गई थी यह प्रसिद्ध रचना?
‘तिरुक्कुरल’ की रचना को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं. माना जाता है कि यह ग्रंथ 300 ईसा पूर्व से 500 ईस्वी के बीच लिखा गया था. इसे शास्त्रीय तमिल साहित्य की सबसे प्रभावशाली रचनाओं में गिना जाता है. नैतिकता, शासन व्यवस्था और मानवीय रिश्तों से जुड़े इसके विचारों ने इसे तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहने दिया. अलग-अलग भाषाओं में इसके अनुवाद के जरिए यह रचना दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंची है.
‘तिरुक्कुरल’ का रूस से क्या है कनेक्शन?
भारत के दर्शन और साहित्य में रूसी रुचि का इतिहास काफी पुराना माना जाता है. कम से कम 17वीं शताब्दी से रूसी लोगों और विद्वानों की भारतीय ज्ञान परंपरा में दिलचस्पी के संकेत मिलते हैं. बाद में यूरोपीय भाषाओं के माध्यम से ‘तिरुक्कुरल’ की शिक्षाएं रूसी विद्वानों और साहित्यकारों तक भी पहुंचीं. माना जाता है कि रूस के प्रसिद्ध लेखक लियो टॉल्स्टॉय का परिचय 19वीं सदी में इसके शुरुआती अनुवाद के जरिए ‘तिरुक्कुरल’ से हुआ था. सदाचार, करुणा और अहिंसा जैसे मूल्यों पर इस ग्रंथ के जोर को उनके दार्शनिक विचारों से भी जोड़ा जाता है. टॉल्स्टॉय और महात्मा गांधी के बीच 20वीं सदी की शुरुआत में हुए पत्राचार के संदर्भ में भी ‘तिरुक्कुरल’ का उल्लेख मिलता है. कुछ विवरणों में दावा किया जाता है कि टॉल्स्टॉय ने गांधीजी को ‘तिरुक्कुरल’ पढ़ने की सलाह दी थी और इसकी शिक्षाओं का गांधीजी के अहिंसा संबंधी विचारों पर प्रभाव पड़ा.
ऐसे में राष्ट्रपति पुतिन को ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी संस्करण भेंट करना सिर्फ एक किताब का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भारत और रूस के पुराने साहित्यिक संबंधों को आधुनिक भारत-रूस रिश्तों से जोड़ने वाला सांस्कृतिक संदेश भी माना जा सकता है.

