भारत के ऑटो सेक्टर में मार्च महीने के दौरान मजबूत तेजी देखने को मिली है. मंगलवार को सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में यात्री वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 4,42,460 यूनिट्स तक पहुंच गई है. इससे पहले, पिछले वर्ष मार्च महीने में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 3,81,358 यूनिट्स थी. इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से बाजार में मांग में सुधार और डीलरशिप के पास पर्याप्त इन्वेंट्री उपलब्ध होना बताया गया है, जिससे ग्राहकों की जरूरतों को तेजी से पूरा किया जा सका.
दोपहिया वाहनों में भी जबरदस्त तेजी, ग्रामीण मांग का बड़ा योगदान
दोपहिया वाहन सेगमेंट में भी इस दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. मार्च महीने में दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 19.3 प्रतिशत बढ़कर 19,76,128 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह आंकड़ा 16,56,939 यूनिट्स था. विशेषज्ञों के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मांग में सुधार, बेहतर वित्तीय विकल्प और उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रय शक्ति का बड़ा योगदान रहा है.
तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी तेज उछाल, छोटे कारोबार को मिला सहारा
तिपहिया वाहन सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है. इस श्रेणी में बिक्री सालाना आधार पर 21.4 प्रतिशत बढ़कर 76,273 यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष मार्च में यह 62,813 यूनिट्स थी. यह बढ़ोतरी खास तौर पर छोटे व्यापार, शहरी परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में बढ़ती गतिविधियों का संकेत देती है.
फरवरी के आंकड़े भी रहे मजबूत, बाजार में बना सकारात्मक माहौल
ऑटो सेक्टर में मजबूती केवल मार्च तक सीमित नहीं रही, बल्कि फरवरी के आंकड़े भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी महीने में कंपनियों से डीलरों को भेजे गए घरेलू यात्री वाहनों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 4,17,705 यूनिट्स तक पहुंच गई. यह लगातार दूसरे महीने बाजार में बनी सकारात्मक स्थिति को दर्शाता है और संकेत देता है कि मांग में स्थिरता बनी हुई है.
वित्त वर्ष 2026 में भी जारी रह सकती है वृद्धि
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि यात्री वाहन सेगमेंट के लिए समग्र दृष्टिकोण फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है. एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारी मांग में मजबूती, हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती और नए मॉडलों के लगातार लॉन्च के चलते वित्त वर्ष 2026 में थोक बिक्री में लगभग 7 से 9 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है. हालांकि, यह भी अनुमान जताया गया है कि उच्च आधार और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के कारण वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर घटकर 4 से 6 प्रतिशत तक रह सकती है.
यूटिलिटी वाहनों का बढ़ता दबदबा, ग्राहकों की पसंद में बदलाव
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ऑटो सेक्टर में संरचनात्मक बदलाव तेजी से हो रहे हैं. यात्री वाहनों की कुल बिक्री में यूटिलिटी वाहनों की हिस्सेदारी अब लगभग 67 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो इस बात का संकेत है कि ग्राहक तेजी से बड़े और प्रीमियम वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं. यह बदलाव ग्राहकों की बदलती जीवनशैली, बेहतर आय और अधिक फीचर्स की मांग को दर्शाता है.
वैकल्पिक ईंधन वाहनों की बढ़ती मांग से बाजार में विविधता
इसके साथ ही, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को अपनाने में भी तेजी आई है. इससे बाजार में मांग का स्वरूप बदल रहा है और उपभोक्ताओं के पास अब ज्यादा विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं. यह ट्रेंड आने वाले समय में ऑटो सेक्टर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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