Chandranath Murder Case: चंद्रनाथ हत्याकांड में बड़ा खुलासा, बांग्लादेश बॉर्डर का भी जिक्र

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Chandranath Murder Case: पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद से माहौल गरमाया हुआ है. अलग-अलग जगहों पर लगातार हिंसा हो रही है. इसी बीच भाजपा के नेता और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात ताबड़तोड़ गोलिया मारकर हत्या कर दी गई. ये घटना राजधानी कोलकाता के करीब मध्यमग्राम में हुई. जिस गाड़ी में वो सवार थे, उसमें विधानसभा पास का स्टिकर भी लगा हुआ है. बीजेपी ने चंद्रनाथ रथ की हत्या को ‘सुनियोजित’ बताया है. वहीं तृणमूल कांग्रेस ने घटना की निंदा करते हुए इसकी जांच की मांग की है. पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है.

ग़ौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में हुए चुनाव में भवानीपुर से टीएमसी नेता और निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को क़रीब 15 हज़ार वोटों से हराया था.

कब और कैसे हुई घटना

पश्चिम बंगाल में मध्यमग्राम का दोहरिया इलाका. देर रात का वक्त था. शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ अपनी कार से गुजर रहे थे. ड्राइवर कार चला रहा था और वो बगल वाली सीट पर बैठे थे. जानकारी के मुताबिक, एक कार काफी देर चंद्रनाथ की स्कॉर्पियो का पीछा कर रही थी. इतने में पीछे वाली कार आगे आती है और उसकी गति धीमी हो जाती है. ऐसे में चंद्रनाथ की कार की भी स्पीड स्लो हो जाती है और साइड से बाइक सवार बदमाश आते हैं और चंद्रनाथ के सीने में तड़ातड़ गोलियां उतार दी जाती हैं. कुल दस राउंड गोलियां चलाई जाती हैं. उनके शरीर से दो गोलियां निकाली गई हैं.

कौन थे चंद्रनाथ रथ?

चंद्रनाथ रथ एक नामचीन शख्सियत थे. खासकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में. वो बीजेपी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) थे, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर काफी दिलचस्प रहा है.

20 साल देश की सेवा: एयरफोर्स से सियासत तक

सियासत में आने से पहले चंद्रनाथ रथ ने देश की सेवा की थी. उन्होंने भारतीय वायुसेना में करीब 20 साल तक अपनी सेवाएं दीं. यह कोई छोटी बात नहीं है. एयरफोर्स में 20 साल सेवा देने के बाद उन्होंने एक नई राह चुनी, राजनीति की. उनकी यह यात्रा दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकता है.

कैसे बने शुभेंदु अधिकारी के क़रीबी?

एक एयरफोर्स अधिकारी, जिसने वर्षों देश की सेवा की, वह कैसे शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीब आ गया? दरअसल, शुभेंदु अधिकारी से उनका जुड़ाव काफी पुराना और गहरा था. शुभेंदु अधिकारी एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है. जब शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की, तो उन्हें भरोसेमंद लोगों की जरूरत थी. चंद्रनाथ रथ उन्हीं में से एक थे.

बीजेपी ने चंद्रनाथ रथ की हत्या को ‘सुनियोजित’ बताया

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के बाद ये आशंका ज़ाहिर की जा रही थी कि हिंसक घटनाएं हो सकती हैं. राज्य में तोड़फोड़ और हिंसा की कई ख़बरें आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बयान जारी कर आरोप लगाया था कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लोग अपनी पहचान बदलकर ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. वहीं शुभेंदु अधिकारी ने घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा, “ये एक सुनियोजित हत्या थी. डीजीपी ने भी यही बताया है. दो-तीन दिन पहले रेकी की गई थी.”

डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता ने कहा…

वहीं, इस घटना पर राज्य के डीजीपी सिद्ध नाथ गुप्ता ने कहा, “मामले की जांच शुरू कर दी गई है. इस क्राइम में जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था, उसे ज़ब्त कर लिया गया है, लेकिन गाड़ी का नंबर प्लेट ग़लत है. हमें घटनास्थल से ज़िंदा कारतूस भी मिले हैं. चश्मदीदों के बयान और अब तक मिले सबूतों के आधार पर इनवेस्टीगेशन को आगे बढ़ाया जा रहा है.”

उत्तरी बंगाल के सिलीगुड़ी में रजिस्टर्ड है गाड़ी

यह गाड़ी उत्तरी बंगाल के सिलीगुड़ी में रजिस्टर्ड है. गाड़ी के असली मालिक का कहना है कि उन्होंने करीब दो हफ़्ते पहले अपनी गाड़ी ऑनलाइन बेचने के लिए डाली थी और हो सकता है कि वहीं से उनकी नंबर प्लेट की नकल की गई हो. इस मामले में बंगाल पुलिस तीन लोगों (स्थानीय हिस्ट्री-शीटर) से पूछताछ कर रही है, लेकिन मुख्य हमलावर फरार हैं. चंद्रनाथ हत्याकांड में बांग्लादेश बॉर्डर का भी जिक्र आया है. हत्याकांड के वक्त मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद बांग्लादेश बॉर्डर की तरफ भागे थे. पुलिस ने चंद्रनाथ हत्याकांड में सुपारी किलर्स के भी शामिल होने का शक जताया है.

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