India Inflation Rate: देश में फिलहाल खुदरा महंगाई दर नियंत्रण में दिखाई दे रही है, लेकिन आने वाले समय में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2027 के दौरान भारत में औसत महंगाई दर 5.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. इसका मतलब यह है कि आने वाले महीनों में लोगों को रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.
क्रिसिल रेटिंग्स की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा संकट का असर धीरे-धीरे भारतीय बाजार पर दिखाई देना शुरू हो सकता है. हालांकि अभी तक उपभोक्ताओं पर महंगाई का पूरा असर नहीं पड़ा है, लेकिन आने वाले समय में दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है.
अप्रैल में महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई, जबकि मार्च में यह 3.40 प्रतिशत थी. हालांकि यह बढ़ोतरी बहुत मामूली रही, लेकिन विशेषज्ञ इसे आने वाले समय के संकेत के तौर पर देख रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक उपभोक्ता तेज महंगाई से काफी हद तक सुरक्षित बने हुए हैं, क्योंकि सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है. इसके अलावा बिजली, गैस और ईंधन की महंगाई में भी कुछ राहत देखने को मिली.
पश्चिम एशिया तनाव का दिख सकता है असर
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब लंबा खिंचता जा रहा है. इस वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है और इसका असर तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे सकता है. रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत 90 से 95 डॉलर प्रति बैरल तक रह सकती है. यह पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 32 प्रतिशत ज्यादा है. अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर भारत में परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है.
अभी क्यों नहीं बढ़ी ज्यादा महंगाई?
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखकर खुदरा ईंधन महंगाई को नियंत्रित किया हुआ है. इसी वजह से उपभोक्ताओं पर महंगाई का पूरा दबाव अभी तक नहीं पहुंचा है. इसके अलावा अप्रैल में आधार प्रभाव के कारण बिजली, गैस और ईंधन महंगाई में कुछ कमी देखने को मिली, जिससे लोगों को राहत मिली. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऊर्जा और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती लागत का पूरा असर अभी बाजार में दिखाई नहीं दिया है.
आने वाले महीनों में बढ़ सकता है दबाव
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उत्पादकों पर ऊर्जा और अन्य इनपुट लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है. इसके साथ ही व्यापार और परिवहन की लागत में भी तेजी आ रही है. ऐसे में कंपनियां आने वाले समय में बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे कोर महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है.
हालांकि रेस्तरां, आवास सेवाओं और घरेलू सामानों की कीमतों में पहले से बढ़ोतरी दिखाई देने लगी है. वहीं कीमती धातुओं की कीमतों में धीमी बढ़ोतरी ने कुछ हद तक राहत जरूर दी है.
मानसून और अल नीनो भी बढ़ा सकते हैं चिंता
रिपोर्ट में मौसम को लेकर भी चिंता जताई गई है. कहा गया है कि संभावित अल नीनो स्थितियों और लगातार पड़ रही लू के कारण सामान्य से कम मानसून वर्षा हो सकती है. अगर मानसून कमजोर रहता है, तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इसका सीधा असर खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य महंगाई फिलहाल निचले स्तर से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही है, लेकिन मौसम खराब रहने पर इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है.
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