तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में वोट देकर भाग रहे 25 विदेशी नागरिक गिरफ्तार, स्याही का निशान देख अधिकारियों ने पकड़ा

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Fake voting exposed in Tamil Nadu: तमिलनाडु में 25 विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने प्रशासन और चुनाव आयोग की नींद उड़ा दी है. इमिग्रेशन अधिकारियों ने चेन्नई और मदुरै हवाई अड्डों पर इन्हें गिरफ्तार किया है. इनमें चार महिलाएं भी शामिल हैं. इन लोगों पर आरोप है कि विदेशी नागरिक होने के बावजूद इन्होंने तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में वोटिंग की है. इनमें सबसे ज्यादा संख्या श्रीलंकाई नागरिकों की है. इनके नाम रंजिनी, सरफुद्दीन, निलंथी, जयनथन, चार्ली बालाचंद्रन, चक्रवर्ती लोगप्रिया और सुनीता चक्रवर्ती बताए जा रहे हैं.

भारत से बाहर जाने की तैयारी में थे ये विदेशी 

यह पूरा मामला तब सामने आया जब ये विदेशी नागरिक भारत से बाहर जाने की तैयारी में थे. इमिग्रेशन अधिकारी हवाई अड्डे पर यात्रियों के दस्तावेजों की सामान्य जांच कर रहे थे. इसी दौरान उनकी नजर कुछ यात्रियों की तर्जनी उंगली पर लगी न मिटने वाली स्याही पर पड़ी. भारत में यह स्याही केवल वोटिंग के समय ही लगाई जाती है. विदेशी पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे लोगों की उंगली पर चुनावी स्याही का निशान देखकर अधिकारी चौंक गए. इसके बाद तुरंत कार्रवाई शुरू की गई और संदिग्धों को हिरासत में ले लिया गया.

भारत में वोटर के तौर पर सक्रिय

जांच का दायरा केवल श्रीलंका तक सीमित नहीं है. गिरफ्तार होने वालों में ब्रिटेन के अय्यादुरई, इंडोनेशिया की टिटिन मारियाटी और कनाडा के जितेंद्रनाथ भी शामिल हैं. इन सभी के पास विदेशी पासपोर्ट थे लेकिन ये भारत में वोटर के तौर पर सक्रिय पाए गए. अधिकारियों के मुताबिक इन विदेशी नागरिकों के पास से न केवल विदेशी पासपोर्ट मिले बल्कि भारत के चुनाव आयोग की ओर से जारी किए गए भारतीय वोटर आईडी कार्ड भी बरामद हुए.

भारतीय वोटर आईडी होना पूरी तरह गैर-कानूनी

भारतीय कानून के तहत यह एक गंभीर अपराध है. कोई भी विदेशी नागरिक भारत का वोटर नहीं हो सकता. एक वरिष्ठ इमिग्रेशन अधिकारी ने बताया कि विदेशी पासपोर्ट धारकों के पास भारतीय वोटर आईडी होना पूरी तरह गैर-कानूनी है. अब इस बात की गहराई से जांच की जा रही है कि इन लोगों ने ये सरकारी दस्तावेज कैसे हासिल किए? यह घटना तमिलनाडु के प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर रही है.

74 लाख नाम लिस्ट से हटाए

चुनाव से ठीक पहले प्रशासन ने वोटर लिस्ट का विशेष गहन संशोधन (SIR) किया था. इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य फर्जी वोटरों, मृत व्यक्तियों और अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो चुके लोगों के नाम हटाना था. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस अभियान के दौरान करीब 74 लाख नाम लिस्ट से हटाए गए थे. इतनी बड़ी सफाई प्रक्रिया के बावजूद विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में कैसे बने रहे? यह सवाल अब वेरिफिकेशन प्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहा है.

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