‘शाहबाज शरीफ नहीं आसिम मुनीर…’, ट्रंप ने दुनिया को बताई पाकिस्तान के लोकतांत्रिक व्यवस्था की सच्चाई

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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US Iran War: मिडिल ईस्ट में शांति के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़े बदलाव लाने की तैयारी में है. उन्होंने इजरायल के साथ खाड़ी के मुस्लिम देशों के रिश्तों को सामान्य करने के लिए अपनी नई योजना पेश की है. इस दौरान सोशल मीडिया पोस्ट में कई राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और राजाओं का नाम लिया गया, लेकिन पाकिस्तान से एक बड़ा नाम गायब था, जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि पाकिस्तान में किसकी चलती है.

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ बातचीत “अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही है” और इसे एक बड़े बदलाव का मौका बताया. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि बातचीत नाकाम हुई, तो हालात फिर “जंग के मैदान” में लौट सकते हैं, और पहले से “ज्यादा बड़े और ताकतवर” संघर्ष की स्थिति बन सकती है.लेकिन यदि बातचीत सफल रही, तो अब्राहम समझौते के बड़े ढांचे के तहत एक ऐतिहासिक समझौता हो सकता है.

ट्रंप ने कहा, अब्राहम समझौते पर एक साथ एक साथ करें हस्ताक्षर

ट्रंप ने कहा कि क्षेत्रीय नेताओं के साथ बातचीत के दौरान- जिनमें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद, कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय और बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा शामिल थे, उन्होंने सभी से कहा कि वे “एक साथ” अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें.

 

वहीं, इस लिस्ट में पाकिस्तान का नाम भी शामिल था. लेकिन उसकी नागरिक सरकार का नहीं. ऐसे में ट्रंप ने पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का नहीं, बल्कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर का नाम लिया. ट्रंप ने अब्राहम समझौते को सफल समझौता बताते हुए कहा कि इसमें पहले से जुड़े देशों- संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाखस्तान में “वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक उछाल” आया है.

अब्राहम समझौता क्या है?

बता दें कि अब्राहम समझौता यानी “अब्राहम अकॉर्ड्स” एक ऐसा समझौता है, जिसके तहत कुछ मुस्लिम देशों ने इजरायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए है. सबसे खास बात ये है कि इतकी शुरुआत अमेरिका की पहल पर 2020 में हुई थी. इसके बाद UAE, बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे देशों ने इजरायल से दोस्ताना संबंध बनाए, व्यापार और यात्रा शुरू की और कई समझौते किए.

अमेरिका का कहना है कि इससे मिडिल ईस्ट में शांति और आर्थिक सहयोग बढ़ेगा. हालांकि कई देश और संगठन इसका विरोध भी करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान हुए बिना इजरायल से रिश्ते सामान्य नहीं होने चाहिए.

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