Laddu Gopal Story: आखिर बाल कृष्ण को क्यों कहा जाता है लड्डू गोपाल? जानिए इस नाम के पीछे की रोचक कथा

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Laddu Gopal Story: सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को ‘लड्डू गोपाल’ के नाम से पूजा जाता है. देशभर के लाखों घरों में लड्डू गोपाल को परिवार के सदस्य और छोटे बच्चे की तरह रखा जाता है. भक्त उन्हें सुबह जगाते हैं, स्नान कराते हैं, नए वस्त्र पहनाते हैं, भोग लगाते हैं और रात में सुलाते भी हैं. यही कारण है कि लड्डू गोपाल की सेवा को केवल पूजा नहीं बल्कि वात्सल्य भाव से की जाने वाली भक्ति माना जाता है.

हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के इस बाल स्वरूप का नाम ‘लड्डू गोपाल’ कैसे पड़ा. इसके पीछे एक बेहद भावुक और भक्तिभाव से भरी पौराणिक कथा बताई जाती है, जिसमें एक मासूम बालक की निष्कपट भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान कृष्ण प्रकट हो गए थे.

भगवान कृष्ण के परम भक्त थे कुंभनदास

पौराणिक कथा के अनुसार कुंभनदास भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे. उनके घर में श्रीकृष्ण की एक छोटी मूर्ति विराजमान थी, जिसकी वे पूरे प्रेम और समर्पण के साथ सेवा करते थे. भगवान की पूजा और भक्ति ही उनके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य थी. कुंभनदास का एक छोटा पुत्र भी था, जिसका नाम रघुनंदन था.

वह भी अपने पिता की तरह भगवान कृष्ण से अत्यंत प्रेम करता था. एक दिन कुंभनदास को वृंदावन में भागवत कथा करने का निमंत्रण मिला. शुरुआत में उन्होंने ठाकुर जी की सेवा का हवाला देकर जाने से इनकार कर दिया, लेकिन लोगों के आग्रह पर अंततः उन्हें जाना पड़ा.

बेटे को सौंप गए ठाकुर जी की सेवा

वृंदावन रवाना होने से पहले कुंभनदास ने ठाकुर जी के भोग की पूरी तैयारी कर दी और अपने पुत्र रघुनंदन से कहा कि समय पर भगवान को भोग लगा देना. इसके बाद वे कथा के लिए रवाना हो गए. पिता के जाने के बाद रघुनंदन ने पूरी श्रद्धा के साथ भोग की थाली भगवान के सामने रख दी. वह मासूम था और उसे विश्वास था कि जैसे इंसान भोजन करते हैं, वैसे ही भगवान भी स्वयं आकर भोजन ग्रहण करेंगे.

मासूम पुकार सुनकर प्रकट हुए भगवान

काफी देर तक जब भोग की थाली वैसे ही रखी रही तो रघुनंदन परेशान हो गया. उसने भगवान से बार-बार विनती की कि वे आकर भोजन ग्रहण करें. जब काफी समय बीत गया तो वह रोने लगा और निष्कपट भाव से ठाकुर जी को पुकारने लगा. कहते हैं कि बालक की सच्ची भक्ति और मासूम पुकार से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न हो गए. उन्होंने एक छोटे बालक का रूप धारण किया और भोग ग्रहण करने लगे. भगवान को भोजन करते देखकर रघुनंदन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

जब कुंभनदास को हुआ आश्चर्य

जब कुंभनदास वापस घर लौटे और उन्होंने प्रसाद मांगा तो रघुनंदन ने बताया कि ठाकुर जी पूरा भोग खा गए. शुरुआत में कुंभनदास को लगा कि बच्चे ने ही प्रसाद खा लिया होगा, लेकिन यह घटना लगातार कई दिनों तक होती रही. इसके बाद कुंभनदास को आश्चर्य हुआ और उन्होंने सच्चाई जानने का निश्चय किया. एक दिन उन्होंने विशेष रूप से लड्डुओं का भोग तैयार किया और छिपकर देखने लगे कि आखिर होता क्या है.

लड्डू खाते हुए प्रकट हुए बाल गोपाल

जैसे ही रघुनंदन ने भगवान के सामने भोग रखा और प्रेम से उन्हें पुकारा, भगवान श्रीकृष्ण पुनः बालक के रूप में प्रकट हो गए. इस बार वे थाली में रखे लड्डू खाने लगे.\ कुंभनदास यह अद्भुत दृश्य देखकर भावविभोर हो गए. वे दौड़कर भगवान के चरणों में गिर पड़े और उनसे कृपा की याचना करने लगे.

कहा जाता है कि उस समय भगवान के एक हाथ में लड्डू था और दूसरा लड्डू वे मुंह तक ले जा रहे थे. इसी दौरान भगवान उसी मुद्रा में स्थिर होकर मूर्ति स्वरूप में परिवर्तित हो गए. भगवान का यह स्वरूप लड्डू खाते हुए प्रकट हुआ था, इसलिए संत कुंभनदास ने उन्हें प्रेमपूर्वक ‘लड्डू गोपाल’ नाम दिया.

तभी से पड़ा लड्डू गोपाल नाम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उसी घटना के बाद भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को ‘लड्डू गोपाल’ के नाम से जाना जाने लगा. आज भी भक्त इसी स्वरूप की पूजा करते हैं और उन्हें अपने परिवार के सबसे छोटे सदस्य की तरह स्नेह और प्रेम से रखते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और पंचांग आधारित सूचनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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