अब डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगा कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले दवा बिक्री के नियम

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Cough Syrup Prescription Rule: कफ सिरप और अन्य सिरप आधारित दवाओं की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए ऐसी दवाओं की बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) बिक्री पर रोक लगा दी है. इस बदलाव के बाद अब उपभोक्ताओं को कफ सिरप खरीदने के लिए पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ द्वारा जारी वैध पर्ची दिखानी होगी.

सरकार का मानना है कि इस कदम से सिरप आधारित दवाओं की बिक्री और वितरण पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी तथा इनके दुरुपयोग पर भी अंकुश लगेगा. नए नियमों को ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के तहत अधिसूचित किया गया है.

क्या है नया नियम?

केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-के (Schedule-K) में संशोधन करते हुए “सिरप” शब्द को छूट प्राप्त दवाओं की श्रेणी से हटा दिया है. अनुसूची-के में उन दवाओं की श्रेणियां शामिल थीं, जिन्हें कुछ विशेष परिस्थितियों में निर्माण, बिक्री और वितरण से जुड़े कुछ कानूनी प्रावधानों से छूट दी गई थी. इस संशोधन के बाद अब सिरप आधारित दवाएं, खासकर कफ सिरप, पहले की तरह बिना सख्त नियामकीय निगरानी के नहीं बेची जा सकेंगी.

गांवों में भी नहीं मिलेगी बिना पर्ची दवा

संशोधन से पहले 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में कफ सिरप को कुछ खुदरा बिक्री लाइसेंस नियमों से छूट प्राप्त थी. ऐसे क्षेत्रों में सीमित शर्तों के तहत इन दवाओं की बिक्री की जा सकती थी. लेकिन ,नए नियम लागू होने के बाद यह छूट समाप्त कर दी गई है. अब छोटे गांवों में भी कफ सिरप की बिक्री और वितरण केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी के माध्यम से ही किया जा सकेगा. इसके लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और ड्रग्स रूल्स, 1945 के सभी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा.

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार यह संशोधन सिरप आधारित दवाओं पर नियामकीय निगरानी को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े मानकों को और प्रभावी बनाने के लिए किया गया है. मंत्रालय का कहना है कि बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं और दवाओं के जिम्मेदाराना उपयोग को ध्यान में रखते हुए नियमों को अपडेट करना जरूरी था. इससे पूरे देश में दवा वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाया जा सकेगा.

कफ सिरप की बिक्री पर होगी कड़ी निगरानी

सरकार का मानना है कि नए नियमों से कफ सिरप की जिम्मेदाराना बिक्री और वितरण को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही सभी राज्यों और क्षेत्रों में नियामकीय मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दवाओं के दुरुपयोग को रोकने और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

कंपनियों और विक्रेताओं को भी निर्देश

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कफ सिरप बनाने वाली कंपनियों, वितरकों और दवा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और ड्रग्स रूल्स के तहत लागू सभी लाइसेंस एवं नियामकीय आवश्यकताओं का सख्ती से पालन करें. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

अब क्या करना होगा उपभोक्ताओं को?

नए नियम लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को कफ सिरप या अन्य निर्धारित सिरप आधारित दवाएं खरीदने के लिए डॉक्टर की वैध पर्ची प्रस्तुत करनी होगी. यानी अब मेडिकल स्टोर से कफ सिरप खरीदना पहले जितना आसान नहीं होगा और बिना प्रिस्क्रिप्शन ऐसी दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी. सरकार का मानना है कि यह कदम दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा.

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