PoK में पाकिस्तानी सेना निहत्थों पर बरसा रही गोलियां, 48 घंटों में 31 लोगों की मौत, और हिंसक हुआ प्रदर्शन

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New Delhi: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का दावा है कि पिछले 48 घंटों में 31 लोगों की मौत हुई है. बुनियादी सुविधाओं, महंगाई और राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है. JAAC का कहना है कि 5 जून से शुरू हुए आंदोलन में अब तक लगभग 100 लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हुए हैं. इनमें नागरिकों के अलावा धार्मिक नेता भी मारे गए हैं

निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी

संगठन का आरोप है कि सुरक्षा बल निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी कर रहे हैं. संगठन के नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा. पाकिस्तान के सांसद मौलाना अता उर रहमान ने सरकार और सेना को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो पाकिस्तान टुकड़े-टुकड़े हो सकता है. उन्होंने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में भी बढ़ते असंतोष का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को बल प्रयोग के बजाय राजनीतिक समाधान तलाशना चाहिए.

PoK चुनाव में मतदान प्रतिशत काफी कम

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि PoK चुनाव में मतदान प्रतिशत सरकारी दावों से काफी कम रहा. कुछ स्थानीय संगठनों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि पाकिस्तान सरकार ने चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बताया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शनकारियों को दुश्मन जैसा बताते हुए उनके साथ बातचीत से इनकार किया. उनके इस बयान की पाकिस्तान के भीतर भी आलोचना हुई.

सरकार उनके साथ बातचीत क्यों करती रही

पाकिस्तानी पत्रकार शहजाद इकबाल ने सवाल उठाया कि यदि सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को भारत का समर्थन प्राप्त है, तो फिर पिछले डेढ़ वर्ष से सरकार उनके साथ बातचीत क्यों करती रही और उनकी कई मांगों को क्यों स्वीकार किया गया. PoK के अलावा बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में भी सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. कई विपक्षी नेताओं ने सेना की राजनीति में भूमिका पर सवाल उठाए हैं.

राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से स्वतंत्र जांच की मांग

JAAC ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से स्वतंत्र जांच की मांग की है. वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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