Container Manufacturing Assistance Scheme: भारत के समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ी पहल करने जा रही है. प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS) का उद्देश्य देश में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देना, आयातित खाली कंटेनरों पर निर्भरता कम करना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है. सरकार के अनुसार, इस योजना के जरिए 53,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है.
भारत की बढ़ती व्यापारिक और विनिर्माण गतिविधियों के बीच कंटेनरों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है. सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर कंटेनर निर्माण क्षमता बढ़ने से समुद्री परिवहन, लॉजिस्टिक्स और निर्यात-आयात गतिविधियों को मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही देश में कंटेनर से जुड़े सहायक उद्योगों के विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
99,149 करोड़ रुपये के निवेश को मिल सकता है प्रोत्साहन
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत विभिन्न आकार के 51 कंटेनर जहाजों के बेड़े के विकास और घरेलू स्तर पर कंटेनरों की खरीद के लिए करीब 99,149 करोड़ रुपये के निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है. इससे भारत में समुद्री परिवहन और निर्यात-आयात गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है. सरकार का कहना है कि कंटेनर निर्माण को घरेलू स्तर पर बढ़ावा मिलने से समुद्री और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में देश की क्षमता बढ़ेगी. इससे आयातित कंटेनरों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ घरेलू विनिर्माण को भी मजबूती मिलेगी.
53 हजार से अधिक रोजगार के अवसर
सरकारी बयान में कहा गया है कि CMAS के जरिए करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हो सकते हैं. इन रोजगार अवसरों का लाभ कंटेनर निर्माण के साथ-साथ इससे जुड़े सहायक उद्योगों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मिलने की संभावना है. इस तरह यह योजना सिर्फ कंटेनर निर्माण क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे जुड़े दूसरे उद्योगों और सेवाओं के विस्तार में भी मदद मिल सकती है.
10 हजार करोड़ रुपये की योजना
प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम के लिए 10,000 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है. यह योजना कंटेनर निर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने और उत्पादन क्षमता में विस्तार पर केंद्रित होगी. सरकार का मानना है कि घरेलू कंटेनर निर्माण बढ़ने से इससे जुड़े कई सहायक उद्योगों को भी फायदा मिलेगा. इनमें कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे उत्पादों का निर्माण करने वाले उद्योग शामिल हैं.
भारत में मजबूत समुद्री विनिर्माण इकोसिस्टम बनाने पर जोर
सरकार ने कहा है कि CMAS भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे सप्लाई चेन को मजबूत करने, रोजगार बढ़ाने और वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. यह योजना मेक इन इंडिया, मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स विकास जैसी सरकार की प्रमुख पहलों के अनुरूप है. इन पहलों का उद्देश्य भारत को समुद्री निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है.
हर साल करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है भारत
भारत की बढ़ती व्यापारिक और विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं के बीच घरेलू कंटेनर निर्माण क्षमता की जरूरत लगातार बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) के अनुसार, वैश्विक माल व्यापार का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्ग से परिवहन किया जाता है. ऐसे में कंटेनरों की पर्याप्त उपलब्धता वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण आधार है. सरकार के मुताबिक, भारत वर्तमान में अपनी जरूरतों को पूरा करने और कंटेनरों की पुनःस्थिति के लिए हर साल करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है. CMAS का उद्देश्य इसी आयात निर्भरता को कम करना और देश में कंटेनर निर्माण का मजबूत आधार तैयार करना है.
भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी समुद्री माल ढुलाई में अस्थिरता
UNCTAD ने अपनी रिपोर्टों में कहा है कि हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनावों के कारण समुद्री माल ढुलाई दरों में अस्थिरता बढ़ी है और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बना है. ऐसे हालात में कई देश कंटेनरों जैसे महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक उपकरणों के घरेलू निर्माण पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. भारत भी इसी दिशा में अपनी घरेलू क्षमता को मजबूत करने पर जोर दे रहा है. सरकार का मानना है कि कंटेनर निर्माण को बढ़ावा मिलने से देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता मजबूत होगी और वैश्विक व्यापार में आने वाली चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी.
शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सुधारों के साथ योजना को जोड़ने की तैयारी
सरकार का मानना है कि शिपिंग, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में चल रहे व्यापक सुधारों के साथ यह नई योजना भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करेगी. इसके साथ ही लंबे समय में देश की वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है. गौरतलब है कि केंद्र सरकार हाल ही में 70,000 करोड़ रुपये के शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज की भी घोषणा कर चुकी है. इसका उद्देश्य घरेलू जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाना और समुद्री विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है.
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