Ethanol Demand: भारत की एथेनॉल इंडस्ट्री अब नई क्षमता स्थापित करने के बजाय मौजूदा क्षमता के बेहतर इस्तेमाल के चरण में प्रवेश कर चुकी है. ई25 मिश्रण लागू होने की स्थिति में देश में एथेनॉल की मांग वित्त वर्ष 2030-31 तक सामान्य यानी बेस केस में बढ़कर 17.9 अरब लीटर तक पहुंचने का अनुमान है. बुधवार को जारी ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में मौजूदा 18.25 अरब लीटर की डिस्टिलेशन क्षमता बेस केस और बेयर केस, दोनों स्थितियों में अनुमानित मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. हालांकि, अगर एथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर ई30 तक पहुंचता है, तो मांग मौजूदा क्षमता से आगे निकल सकती है और नई डिस्टिलेशन क्षमता स्थापित करने की जरूरत बढ़ जाएगी.
ई25 पर क्षमता का 98% इस्तेमाल होने का अनुमान
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के बेस केस अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2030-31 तक एथेनॉल की मांग 17.9 अरब लीटर रह सकती है. इस स्थिति में मौजूदा 18.25 अरब लीटर क्षमता का लगभग 98 प्रतिशत इस्तेमाल होगा. वहीं, अगर ब्लेंडिंग ई20 पर ही बनी रहती है, तो बेयर केस में मांग 14.3 अरब लीटर रहने का अनुमान है. इसके तहत मौजूदा क्षमता का लगभग 78 प्रतिशत इस्तेमाल होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि एथेनॉल ब्लेंडिंग ई30 तक पहुंचती है, तो बुल केस में वित्त वर्ष 2030-31 तक मांग बढ़कर 21.5 अरब लीटर हो सकती है. यह मौजूदा डिस्टिलेशन क्षमता से लगभग 18 प्रतिशत अधिक होगी.
ई30 पर नई क्षमता बनाने की जरूरत बढ़ेगी
रिपोर्ट के अनुसार, ई30 वह स्तर होगा जहां एथेनॉल सेक्टर मौजूदा संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से आगे बढ़कर नई उत्पादन क्षमता स्थापित करने की जरूरत की ओर बढ़ सकता है. रेटिंग एजेंसी का मानना है कि ब्लेंडिंग पॉलिसी की रफ्तार ही अतिरिक्त पूंजीगत व्यय और इस सेक्टर की वृद्धि तय करने वाला प्रमुख कारक बनी रहेगी. यानी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य जिस गति से आगे बढ़ेगा, उसी के अनुसार नई क्षमता की जरूरत भी तय होगी.
अनाज आधारित एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ी
रिपोर्ट में कहा गया है कि फीडस्टॉक यानी एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के ढांचे में संरचनात्मक बदलाव से मांग का परिदृश्य भी बदल रहा है. ESY26 के पहले चरण के आवंटन में अनाज आधारित उत्पादन मार्ग की हिस्सेदारी 72% रही, जबकि चीनी आधारित मार्ग की हिस्सेदारी 28% थी. यह 2021 के रोडमैप में तय किए गए 55:45 के चीनी-अनाज अनुपात के उलट है. आंकड़ों के मुताबिक, कुल आवंटन में अकेले मक्के की हिस्सेदारी 45.7% रही.
अनाज आधारित डिस्टिलरीज के मार्जिन पर दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, अनाज आधारित डिस्टिलरीज के ईबीआईटीडीए मार्जिन में गिरावट दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2020-21 में यह 9.2 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 6.7 प्रतिशत रह गया. रेटिंग एजेंसी ने इस गिरावट को फीडस्टॉक की लागत के दबाव का संकेत बताया है. कच्चे माल की लागत में बदलाव एथेनॉल उत्पादकों के मार्जिन और परिचालन प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है.
अब क्षमता के बेहतर इस्तेमाल और कमाई पर रहेगा जोर
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के अनुमान के मुताबिक, ई20 का लक्ष्य काफी हद तक हासिल हो चुका है और देश में पर्याप्त उत्पादन क्षमता पहले से मौजूद है. ऐसे में एथेनॉल सेक्टर का ध्यान अब क्षमता के बेहतर इस्तेमाल, फीडस्टॉक के अनुकूलतम उपयोग और मौजूदा परिसंपत्तियों से कमाई बढ़ाने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ब्लेंडिंग ई30 की ओर बढ़ती है, तो नई डिस्टिलेशन क्षमता की अहमियत बढ़ जाएगी.
एथेनॉल सेक्टर का क्रेडिट आउटलुक स्थिर
रेटिंग एजेंसी ने एथेनॉल सेक्टर के लिए क्रेडिट आउटलुक स्थिर बनाए रखा है. इसके पीछे सरकार द्वारा नियंत्रित खरीद और मूल्य निर्धारण व्यवस्था, ई20 ब्लेंडिंग लक्ष्य की प्राप्ति और सेक्टर को मिलने वाली वित्तीय सहायता जैसे कारक बताए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने एथेनॉल सेक्टर के लिए 420 अरब रुपये से अधिक की मंजूरी दी थी. इन कारकों को सेक्टर के क्रेडिट आउटलुक को स्थिर बनाए रखने में सहायक माना गया है.
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